शासन के संयुक्त सचिव राजेंद्र प्रसाद ने कमिश्नर को भेजे आदेश में कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। पत्र के अनुसार, त्वरित आर्थिक विकास योजना से बलरामपुर बाईपास के चौड़ीकरण की स्वीकृत लागत 21 करोड़ 85 लाख छह हजार रुपये थी। उसी समय इसी मार्ग पर 680 मीटर लंबाई में रेलवे ओवरब्रिज की स्वीकृति एवं निर्माण के कारण मार्ग के बजट में परिवर्तन किया गया।
इस कारण लगभग 1.61 करोड़ रुपये की लागत से कार्य में बदलाव किया गया। उस समय जिलाधिकारी के निर्देश पर फुलवरिया बाईपास से कलेक्ट्रेट, विकास भवन और पुलिस अधीक्षक कार्यालय तक तीन मीटर चौड़ी सड़क का निर्माण कराया गया, जिसकी कुल लंबाई लगभग एक किलोमीटर बताई गई।
कार्य पूर्ण होने के बाद जुलाई 2022 में शेष पांच प्रतिशत धनराशि की मांग की गई, जिसमें लागत कम करने की अनदेखी कर भुगतान किया गया। पूरा मामला 9 दिसंबर 2025 को सामने आया। तत्कालीन जिलाधिकारी पवन अग्रवाल ने शासन को रिपोर्ट भेजकर बताया कि योजना में परिवर्तन के कारण बजट घटकर 21 करोड़, 63 लाख, 48 हजार रुपये किया जा चुका था। उस समय कार्यदायी संस्था पीडब्ल्यूडी को 20 करोड़, 75 लाख, 81 हजार रुपये जारी किए जा चुके थे। इसके बावजूद बिना शासन की अनुमति के कार्यदायी संस्था ने एक करोड़, 61 लाख, 60 हजार, 380 रुपये अधिक खर्च कर लिए।
पत्र में स्पष्ट किया गया है कि कार्यदायी संस्था ने बिना अनुमति के अतिरिक्त निर्माण कराया। शासन ने इस प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए अधिक खर्च की गई धनराशि की वसूली करने और जिम्मेदारी तय करने के निर्देश दिए हैं। ऐसे में अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जिम्मेदारी किस स्तर पर तय होगी और वसूली की कार्रवाई कैसे आगे बढ़ेगी।