बलरामपुर। पश्चिम बंगाल में डॉक्टरों पर हमले को लेकर जिले में भी विरोध शुरू हो गया है। डॉक्टरों की मांग है कि उन्हें मरीजों के सेवा के दौरान पर्याप्त सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए। सुरक्षा न मिलने पर डॉक्टरों ने उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है। निजी डॉक्टरों के हड़ताल के चलते सरकारी अस्पतालों में मरीजों की भारी भीड़ जुटी।
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन एवं इंडियन डेंटल एसोसिएशन की तरफ से सोमवार को लामबंद होकर डॉक्टरों ने विरोध जताया। पश्चिम बंगाल में हुई घटना की सभी निजी डॉक्टरों ने कड़ी निंदा की। चिकित्सा सेवाएं ठप रखी गईं। केंद्र व राज्य सरकारों से सभी डॉक्टरों को पर्याप्त सुरक्षा प्रदान करने की मांग की गई।
डॉ. एके भट्ट, डॉ. अब्दुल कय्यूम, डॉ. कुलदीप विश्वकर्मा, डॉ. विकास अग्रवाल, डॉ. सौरभ सिंह, डॉ. नवीन वर्मा, डॉ. आतिफ रहमान, डॉ. शंकर सिंह, डॉ. ऋषिराज सिंह, डॉ. वाईपी गुप्ता, डॉ. केबी तिवारी, डॉ. मुकेश श्रीवास्तव, डॉ. अशोक सिंह व डॉ. प्रमोद श्रीवास्तव आदि ने विरोध जताते हुए कहा कि यदि केंद्र व प्रदेश सरकार की तरफ से सुरक्षा प्रदान नहीं की गई तो उग्र आंदोलन किए जाएंगे। निजी चिकित्सकों के हड़ताल के चलते मरीजों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
प्रावेंशियल मेडिकल सर्विस एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष डॉ. जयंत कुमार, महामंत्री डॉ. आरके सिंह, सीएमओ डॉ. घनश्याम सिंह व डॉ. सारिका साहू आदि ने अपने-अपने अस्पतालों में काली पट्टी बांधकर कार्य किया। सरकारी अस्पतालों के डॉक्टरों ने भी पश्चिम बंगाल के घटना की कड़ी निंदा करते हुए पर्याप्त सुरक्षा मुहैया कराए जाने की मांग की।
सरकारी डॉक्टरों ने सुरक्षा में भूतपूर्व सैनिकों को जिम्मेदारी सौंपने की मांग उठाई। जिलाध्यक्ष ने बताया कि संयुक्त जिला अस्पताल, जिला मेमोरियल अस्पताल, जिला महिला अस्पताल के साथ-साथ जिले के सभी 9 सीएचसी व 24 पीएचसी में तैनात डॉक्टरों ने काली पट्टी बांधकर सेवाएं दीं और मरीजों का इलाज किया है।