बलरामपुर। जिले में लगातार हो रही बारिश के बीच सांप काटने की घटनाएं बढ़ गई हैं। बीते करीब डेढ़ महीने में जिले के विभिन्न क्षेत्रों में 148 लोगों को सांप ने काट लिया, जिनमें पांच लोगों की मौत हो गई। अधिकांश घटनाएं ग्रामीण इलाकों में खेतों, घरों के आसपास जलभराव और झाड़ियों के बीच हुई है।
जिला मेमोरियल अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में बीते 24 घंटे में सांप के काटने से चार मरीज भर्ती हुए। इसमें एक की हालत गंभीर होने पर उसे बहराइच मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। इमरजेंसी के चिकित्साधिकारी डॉ. सुमित कुमार ने बताया कि लालपुर की चांदनी (14), सेखुई कला के नीरज (25), सोनौढ़ा की मीना देवी (30) व सुगानगर डुमरी के सूरज कुमार (37) को सांप ने डस लिया था।
परिजनों ने उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया। सही समय पर उपचार शुरू होने पर नीरज, चांदनी व मीना देवी पूरी तरह स्वस्थ हो गई। जबकि सूरज कुमार की हालत बिगड़ने पर उन्हें बहराइच मेडिकल कॉलेज रेफर करना पड़ा। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों की मानें तो जून से अब तक सर्पदंश की 148 घटनाएं सामने आई है। इनमें से पांच लोगों की मौत हो गई। आपदा विभाग की मानें तो पांच मृतक के परिजनों को चार-चार लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी गई है।
जिला आपदा सलाहकार अरुण सिंह ने बताया कि सर्पदंश की घटना पर मृतकों के परिवारजन को चार-चार लाख रुपये आर्थिक सहायता दी जाती है। सर्पदंश से मौत होने पर पोस्टमार्टम कराना अनिवार्य है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सर्पदंश की पुष्टि होने पर परिवारजन क्लेम करके आर्थिक सहायता राशि का लाभ ले सकते हैं।
जिला मेमोरियल अस्पताल के सीएमएस डॉ. हीरालाल ने कहा कि जिला अस्पताल में सर्पदंश पीड़ितों के उपचार के लिए एंटी स्नेक वेनम (एएसवी) की पर्याप्त व्यवस्था है। सर्पदंश के बाद झाड़-फूंक या घरेलू उपचार में समय गंवाने के बजाय मरीज को तुरंत नजदीकी सरकारी अस्पताल पहुंचाना चाहिए। समय पर उपचार मिलने से जान बचने की संभावना काफी बढ़ जाती है।
बचाव के लिए रहें सतर्क
जिला मेमोरियल अस्पताल के एनसीडी क्लीनिक चिकित्साधिकारी डॉ. ऋषि श्रीवास्तव ने बताया कि बारिश के सांप दिखाई देना आम बात है। बारिश के मौसम में खेतों में काम करने वाले किसानों, मजदूरों और घरों के आसपास रहने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतना चाहिए। रात के समय टॉर्च का प्रयोग करें, खेतों में ऊंचे जूते पहनकर जाएं और घर के आसपास झाड़ियों व जलभराव को साफ रखें। जमीन पर सोने से बचें व बच्चों को भी सतर्क रहने के लिए जागरूक करें।