बैरिया। थाना क्षेत्र के मधुबनी निवासी युवक रविवार की सुबह दरवाजे के पास लगा टिन शेड सीधा करते समय विद्युत करेंट की चपेट में आ गया। हो हल्ला पर जब तक लोग इकट्ठा हुए संदीप काफी झुलस कर बेहोश हो चुका था। आनन-फानन में आसपास के लोगों ने युवक को सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र सोनबरसा ले गए, लेकिन चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
बताया जाता है कि शुक्रवार को आई आंधी-पानी में संदीप 24 पुत्र जगरनाथ यादव के घर के सामने दरवाजे का टिन शेड गिर गया था। टिन शेड के उपर से बिजली का केबिल खींचा गया था जो शेड के गिरने से कट गया और इसके चलते शेड में करेंट उतर आया था। संदीप कटे तार को नहीं देख सका और टिन शेड को सीधा करने लगा और इसी दौरान वह करेंट की चपेट में आ गया। करेंट लगने के बाद संदीप कुछ देर तक छटपटाने के बाद बेहोश होकर गिर गया। हादसे के समय मृतक संदीप की मां कांति देवी नहीं थी वह अपनी मायके हड़िहा कला गई थी। जबकि पिता जगरनाथ यादव पंजाब के लुधियाना स्थित एक खटाल में काम करते हैं। भाई को छटपटाते देख घर में मौजूद छोटी बहन संध्या व छोटा भाई विशाल हो हल्ला मचाया तब लोगों की भीड़ इकट्ठा हो गई और बिजली का कनेक्शन काटने के बाद बेहोश पड़े संदीप को लोगों ने अस्पताल पहुंचाया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर अंत्य परीक्षण के लिए भेज दिया।
बेटे की मौत के बाद जान देने को आतुर थी मां
बैरिया। मायके से किसी तरह भागी-भागी दरवाजे पर पहुंच अपने बड़े बेटे को मृत देख कान्ति देवी खुद का ही गला दबाने लगी। आसपास की महिलाएं बचाने की कोशिश की तो कान्ति ने कहा 25 साल तक आपन बड़का के रोज निहार-निहार के सोचत रहनी हा कि अब हमार गरीबी दूर हो जाई, लेकिन पता ना का अपराध कईले रहनी ह कि भगवान हमार लाल छीन लिहलन।
आईटीआई करके नौकरी की तलाश में था संदीप
बैरिया। संदीप के परिवारीजन की आर्थिक स्थिति बेहद खराब है। पिता पंजाब राज्य के लुधियाना में एक खटाल में नौकरी कर कुछ पैसे भेजते हैं तो किसी तरह घर चलता है। दो बहनों में बड़ी बहन की शादी हो चुकी है, जबकि छोटी बहन की शादी होनी है। छोटा भाई अभी पढ़ाई कर रहा है। संदीप आईटीआई करके नौकरी की तलाश में था।
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बेटे की मौत के बाद मां ने गले से नोंच कर फेंका जीउतिया
बैरिया। पुत्र के लंबी आयु के लिए जिस जीउतिया पर्व रख कर कान्ति ने गले में सोने की जीउतिया पहनी थी, बेटे की मौत देख वह असहज हो गई। कान्ति को बार-बार गले से जीउतिया नोच कर फेंक रही थी। अपने लाल के खोने के गम में कान्ति को सोने के जीउतिया का रंग भी फीका दिखने लगा। आसपास की महिलाओं ने फेंकी गई सोने की तीन जीउतिया में से दो को खोज लिया लेकिन एक जीउतिया नहीं मिला।