रसड़ा कोतवाली क्षेत्र के जकिरिया गांव में सेना के मृत चालक अरविंद कुमार सिंह का शव मंगलवार देर शाम जैसे ही घर पहुंचा, कोहराम मच गया। मां रोती हुई चिल्ला रही थी कि देश के सेवा करे खातिर भेज दिहनी।
हमके का पता रहे कि हमरो से पहिले हमार बेटवा चली जईहें। अगर हम इ जनती त सेना में कबहूं ना भेजती। हम का जननी दोस्ती करके उ दुशमनवा ललवा के जान से मार दी। बता दें कि मेरठ के कंकरखेड़ा में अरविंद की उसी के साथी ने गोली मारकर हत्या कर दी थी।
मृतक चालक का शव लेकर सेना के सूबेदार केसी मिश्रा, एसएन तिवारी, अमलेश कुमार और वाराणसी से सेना नायक सूबेदार तेजेंद्र सिंह ठकुरी, नायक कुमार थापा, छोटेलाल यादव, नायक अनिल जैसे ही पैतृक गांव पहुंचे, मां संध्या सिंह और पत्नी सरिता सिंह, भाई अजीत सिंह सहित बच्चे दहाड़े मार-मारकर चिल्लाने लगे। इसे देख सभी की आंखें बरबस ही नम हो जा रही थीं। चारों तरफ का माहौल गमगीन था।
इस दौरान पड़ोस की महिलाएं मां और पत्नी को ढांढस बंधाती रहीं। पत्नी तो किसी को भी देखते ही पति का दुश्मन समझ मारने के लिए दौड़ा ले रही थी। वह चिल्ला रही थी कि जब तक दुश्मनवा के फांसी न होई, तब तक हमरा कलेजा के चैन ना मिली।
पुत्री निकिता पापा का शव देख बार- बार बेहोश हो जा रही थी। दोनों पुत्र रोते-रोते पापा के दुश्मन को मारने के लिए चिल्ला रहे थे। मृतक की तीनों बहनें भी भाई के लिए दहाड़े मारकर चिल्ला रही थीं। इस मौके पर विजय यादव, मुन्नी चौधरी, शशि यादव, मनोज सिंह, तुषार सिंह, पूर्व प्रमुख रामेश्वर पांडेय समेत सैकड़ों पुरुष और महिला मौजूद रहे।