मां, गर्भवती पत्नी और दो मासूमों का सहारा छीन गया
हादसे ने संतोष सिंह टुनटुन (40) के परिवार की खुशियां पल भर में छीन लीं। शुक्रवार की सुबह संतोष के घर पर भीड़ में हर किसी की आंखें नम थीं और एक ही सवाल था आखिर किस कसूर की इतनी बड़ी सजा मिली है।
बरामदे में बैठी मां इंद्रावती देवी की आंखें सूखने का नाम नहीं ले रही थीं। सहारे की जरूरत से जूझती बूढ़ी मां हर आने-जाने वाले को देखकर फफक पड़तीं। उनकी एक ही पुकार सबको भीतर तक हिला दे रही थी, भगवान, तूने मेरा इकलौता सहारा क्यों छीन लिया। उधर आंगन में संतोष की गर्भवती पत्नी वंदना सिंह, जिनका प्रसव 30 नवंबर तक होना है, बदहवासी में बेहोश हो जा रही थीं।
महिलाएं उन्हें संभालतीं, पर उनकी टूटती हुई आवाज सभी को रुला दे रही थी। वह रो-रोकर बस एक ही बात कहे जा रही थीं, आने वाला बच्चा पहली बार किसकी गोद में जाएगा। वंदना के करुण क्रंदन और चीत्कार से हर आंख नम थी। बाहर बैठे संतोष के बेटे शौर्य प्रताप (10) और वीर प्रताप (8) अब तक सच्चाई से अनजान थे। बार-बार यही कह रहे थे, पापा वाराणसी में इलाज करा रहे हैं, जल्दी ठीक होकर आ जाएंगे।