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UP: 'भगवान...तूने मेरा इकलौता सहारा छीन लिया', बेटे की मौत पर मां की चित्कार; गर्भवती पत्नी-दो मासूम बिलख पड़े

Fri, 28 Nov 2025 09:32 PM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, बलिया।

सार

Ballia News: उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में स्काॅर्पियो की टक्कर से दो युवक घायल हो गए। इनमें एक की माैत हो गई, वहीं दूसरे की हाल गंभीर है। हादसे के बाद चालक वाहन लेकर भाग निकला। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
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दर्दनाक हादसे के बाद बिलखतीं महिलाएं। - फोटो : संवाद
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विस्तार
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UP News: बलिया–सिकंदरपुर मार्ग पर बृहस्पतिवार की रात पटपर पेट्रोल पंप के पास सड़क हादसे में खेजुरी थाना क्षेत्र के खड़सरा निवासी संतोष सिंह टुनटुन (40) की मौत हो गई। हादसे में गंभीर रूप से घायल मधुरेन्द्र सिंह (38) का उपचार मऊ के एक निजी अस्पताल में चल रहा है। दोनों युवक पिपरा से निमंत्रण कर लौट रहे थे।

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प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, घर लौटते समय चालक ने बाइक जैसे ही मुख्य मार्ग पर चढ़ाई, पीछे से आ रही तेज रफ्तार स्कॉर्पियो ने टक्कर मार दी। इससे दोनों युवक करीब 10 फीट दूर जा गिरे। स्थानीय लोगों ने घायलों को जिला अस्पताल भिजवाया, लेकिन संतोष ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। हादसे के बाद स्कॉर्पियो चालक वाहन छोड़कर भाग निकला। 

थानाध्यक्ष मिथलेश कुमार ने बताया कि पुलिस ने स्कॉर्पियो को कब्जे में ले लिया है। वाहन मालिक और चालक की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है। संतोष सिंह परिवार के इकलौते पुत्र थे। पिता महिपाल बहादुर सिंह (दारोगा सिंह) का निधन लगभग 15 वर्ष हो चुका था। संतोष अपने परिवार की उम्मीद और मुख्य सहारा थे।

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मां, गर्भवती पत्नी और दो मासूमों का सहारा छीन गया
हादसे ने संतोष सिंह टुनटुन (40) के परिवार की खुशियां पल भर में छीन लीं। शुक्रवार की सुबह संतोष के घर पर भीड़ में हर किसी की आंखें नम थीं और एक ही सवाल था आखिर किस कसूर की इतनी बड़ी सजा मिली है।

बरामदे में बैठी मां इंद्रावती देवी की आंखें सूखने का नाम नहीं ले रही थीं। सहारे की जरूरत से जूझती बूढ़ी मां हर आने-जाने वाले को देखकर फफक पड़तीं। उनकी एक ही पुकार सबको भीतर तक हिला दे रही थी, भगवान, तूने मेरा इकलौता सहारा क्यों छीन लिया। उधर आंगन में संतोष की गर्भवती पत्नी वंदना सिंह, जिनका प्रसव 30 नवंबर तक होना है, बदहवासी में बेहोश हो जा रही थीं। 

महिलाएं उन्हें संभालतीं, पर उनकी टूटती हुई आवाज सभी को रुला दे रही थी। वह रो-रोकर बस एक ही बात कहे जा रही थीं, आने वाला बच्चा पहली बार किसकी गोद में जाएगा। वंदना के करुण क्रंदन और चीत्कार से हर आंख नम थी। बाहर बैठे संतोष के बेटे शौर्य प्रताप (10) और वीर प्रताप (8) अब तक सच्चाई से अनजान थे। बार-बार यही कह रहे थे, पापा वाराणसी में इलाज करा रहे हैं, जल्दी ठीक होकर आ जाएंगे।
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