बलिया। अपराध की दुनिया पर नकेल कसने के लिए पुलिस अब एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) तकनीक यक्ष एप का सहारा ले रही है। जिले में अब तक एसपी, दो एएसपी, चार सीओ, 24 थाना प्रभारी, चौकी प्रभारी, उपनिरीक्षक सहित आठ सौ से अधिक पुलिसकर्मी इस एप को अपने मोबाइल में डाउनलोड कर चुके हैं।
यक्ष एप को प्रभावी रूप से लागू करने के लिए हल्का प्रभारी, चौकी प्रभारी संग बीट के सिपाहियों को जिम्मेदारी दी गई है। सभी को अपनी-अपनी बीट में आने वाले शहर से लेकर गांवों तक की जियो टैगिंग करनी है ताकि अपराधियों का सटीक सत्यापन हो सके। एक क्लिक पर अपराधी का नाम, पता, गैंग कनेक्शन, पिछले अपराध और वर्तमान लोकेशन की जानकारी मिल जाएगी। यदि कोई अपराधी अपने तय निवास स्थान से अचानक लापता होता है या अपनी लोकेशन बदलता है, तो संबंधित थाने और बीट सिपाही को तुरंत अलर्ट मिल जाएगा। एक फरवरी से इस प्रणाली के लिए जिले में पुलिस कर्मियों ने डेटा डिजिटाइजेशन का काम युद्धस्तर पर शुरू कर दिया है।
हुलिया व लोकेशन बदलने पर होगी जानकारी : यक्ष एप की सबसे बड़ी खासियत इसकी एआई आधारित पहचान प्रणाली है। इसमें उन्नत फेशियल एवं वॉयस रिकग्निशन तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। अपराधी हुलिया बदलकर या फर्जी नाम से रह रहा है, तो पुलिस उसकी फोटो लेकर एप के जरिये उसका पूरा विवरण खोल सकती है। यदि कोई अपराधी अपने तय निवास स्थान से अचानक गायब होता है या अपनी लोकेशन बदलता है, तो संबंधित थाने और बीट सिपाही को तुरंत अलर्ट मिल जाता है।
एसपी ओमवीर सिंह ने कहा कि यक्ष एप से पुलिसिंग हाईटेक होगी। इससे अपराध और अपराधियों पर प्रभावी नियंत्रण में मदद मिलेगी। पुलिसकर्मियों को एप संचालन के लिए प्रशिक्षित किया गया है। लगातार इसकी निगरानी हो रही है।