जिले में महिलाओं के साथ हत्या, छेड़खानी और दुष्कर्म की वारदातें थमने का नाम नहीं ले रही हैं। पिछले दो माह में उनके साथ दर्जनभर से अधिक हादसे हुए। वहीं पुलिस के लचर रवैये से महिलाएं खुद का असुरक्षित महसूस कर रही हैं।
पिछले दो माह पर गौर किया जाए तो महिलाओं के साथ करीब दर्जनभर जघन्य वारदातें हुईं जिससे जनपद थर्रा उठा। चाहे वह छात्रा रागिनी की निर्मम हत्या हो अथवा छात्राओं के साथ छेड़खानी, सामूहिक दुष्कर्म का मामला हो। खास बात यह रही कि इन घटनाओं को लेकर पुलिस प्रशासन का रवैया अब तक ढुलमुल ही रहा है। महिला उत्पीड़न और छेड़खानी जैसी वारदातों में भी पुलिस की लचर व्यवस्था के चलते उसकी कार्यशैली पर प्रश्न चिह्न लग गया है। शायद यही वजह है कि पीड़ित न्याय के लिए पीएम, सीएम और राज्यपाल से गुहार लगानी पड़ रही है।
छेड़खानी की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए प्रदेश सरकार ने एंटी रोमियो स्क्वायड का गठन किया, लेकिन जनपद में इसका खास असर नहीं दिख रहा। जिस तरह से छेड़खानी, दुष्कर्म और महिला उत्पीड़न का ग्राफ बढ़ा है, यह चिंता का विषय बनता जा रहा है। सोमवार को ही महिलाओं से सम्बंधित 06 मामले सामने आये, जिसमे पीड़िताओं ने अफसरों से न्याय की गुहार लगाई है।