घटना के बाद मौके पर जुटी भीड़
- फोटो : अमर उजाला
परिजनों का आरोप है कि 30 जून को जब माधुरी की हालत गंभीर हो गई तो उसे लेकर पहले फातिमा अस्पताल मऊ गए, जहां गंभीर हालत में होने के कारण उसे भर्ती करने से मना कर दिया गया। इसके बाद उसे प्रकाश अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान सोमवार की रात करीब 11 बजे उसकी मौत हो गई।
परिजनों के अनुसार, मऊ के चिकित्सकों ने बताया कि ऑपरेशन गलत तरीके से किया गया था और संक्रमण पूरे पेट में फैल गया था। मंगलवार की सुबह जब परिजन शव लेकर उस अस्पताल पर पहुंचे, जहां ऑपरेशन हुआ था। वहां अस्पताल में ताला लगा था और सभी कर्मचारी फरार हो चुके थे।
इसे भी पढ़ें; New Criminal Laws: नए आपराधिक कानून के 365 दिन पूरे, वाराणसी में अब तक दर्ज हुए 8500 मुकदमे
आक्रोशित परिजनों ने शव वहीं सड़क पर रख दिया और प्रदर्शन शुरू कर दिया। मृतका की मासूम बच्ची को गोद में लिए उसकी चाची पौधारी देवी बार-बार बेहोश हो जा रही थीं। यह दृश्य देखकर वहां मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं। मृतका के पिता बार-बार यही कह रहे थे, 'अगर उर्मिला मेरी बच्ची को उस अस्पताल में नहीं ले जाती तो आज वो जिंदा होती।'
घटना के बाद मौके पर जुटी भीड़
- फोटो : अमर उजाला
परिजन दोषी चिकित्सकों पर कड़ी कार्रवाई और मुआवजे की मांग कर रहे हैं। स्थानीय प्रशासन मौके पर पहुंचकर परिजनों को शांत कराने और मामले की जांच का आश्वासन देने में जुटा है।
मुख्य चिकित्साधिकारी संजीव वर्मन के निर्देश पर जांच करने पहुंचे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सिकंदरपुर के प्रभारी दिग्विजय सिंह व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बघुड़ी के अधीक्षक चंदन सिंह बिसेन के नेतृत्व में टीम परिजनों व पुलिस से घटना के बारे में जानकारी ली और अस्पताल को सील कर कार्रवाई में जुट गई।