झुलसाने वाली पछुआ गर्म हवा अब जानलेवा हो गई है। सोमवार को सुखपुरा कस्बा निवासी किसान सुरेश सिंह (45) की लू लगने से जान चली गई। सोमवार को पछुआ हवाओं का जोर अधिक रहा। बाहर निकलने शरीर झुलस जा रहा था। कड़ी धूप का असर यह रहा कि शाम ढलने के बाद भी धरती तपती रही। गर्म हवा देर शाम तक चलती रही। रात गहराने के बाद लोगों को राहत मिली।
भीषम गर्मी के प्रकोप से आम जनमानस बेहाल है। ऊपर से पछुआ हवा भी अब तेज होती जा रही है। सोमवार को कड़ी धूप के चलते लोग घरों में ही कैद रहे। बहुत जरूरी होने पर ही बाहर निकले। जो लोग बाहर निकले, पूरे शरीर को ढककर ही निकले। तपती दोपहरी में सड़कों पर सन्नाटा पसरा था। कहीं-कहीं इक्कादुक्का लोग ही दिखे। नगर समेत देहात क्षेत्रों में अब पानी की किल्लत से भी लोगों को दो-चार होना पड़ रहा है।
भूगर्भीय जलस्तर तेजी से नीचे खिसक रहा है। इसका असर अब दिखने लगा है। मुहल्लों में एक-दो हैंडपंप से ही पानी निकल रहा है। इन हैंडपंपों पर सुबह-शाम पानी के लिए भीड़ जमा हो जा रही है। उधर सुखपुरा कस्बा निवासी किसान सुरेश सिंह (45) की मौत सोमवार को लू लगने के कारण हो गई। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर अंत्य परीक्षण के लिए भेज दिया। उधर घर पर कोहराम मच गया। सुरेश अपने खेतों में गए थे। लौटने के बाद उनकी तबियत खराब होने लगी।
गर्मी के चलते भूगर्भीय जलस्तर नीचे खिसकने लगा है। इसके चलते पेयजल संकट बढ़ गया है। आसमान से बरसते अंगारे ने जनजीवन को बेहाल कर दिया है। सुबह से ही तीखी धूप लगने लग रही है। जलस्तर नीचे चले जाने से कम गहराई वाले हैंडपंपों ने पानी उगलना बंद कर दिया है। ग्रामीण क्षेत्रों में इंडिया मार्का हैंडपंपों की स्थिति भी ठीक नहीं है। नगरीय क्षेत्र में जर्जर पुरानी टंकी से दूषित पेयजल की आपूर्ति हो रही है। जबकि जलनिगम के अधिकारियों के उदासीन रवैये से जिला पंचायत के डाक बंगला के प्रांगण में बनी नई टंकी से अभी तक जलापूर्ति शुरू नहीं की गई है। इसको लेकर लोगों में नाराजगी है।