सावन के तीसरे सोमवार को नगर से लेकर ग्रामीणांचलों के शिवालयों पर श्रद्धालुओं ने बेलपत्र, भांग, धतूरा, गंगाजल, दूध व फूल माला चढ़ाकर परिवार के सुख-समृद्धि की कामना की। इस दौरान महिला-पुरुष भोर से ही कतारबद्ध होकर बाबा भोले नाथ का दर्शन-पूजन करते रहे। घंट-घड़ियाल एवं हर-हर महादेव के जयघोष से परिसर शिवमय हो गया। सुरक्षा के मद्देनजर नगर के बालेश्वर व भृगु मंदिर समेत जिले के प्रमुख शिवालयों पर पुलिस मुस्तैद रही। उधर, कांवरियों का जत्था भी दिन भर बाबा बालेश्वर नाथ व भृगु बाबा का दर्शन कर देवघर के लिए रवाना हुआ।
नगर के बालेश्वर मंदिर, कैलास धाम व भृगु मंदिर का दरवाजा 12 बजे रात के बाद श्रद्धालुओं के दर्शन-पूजन के लिए कमेटी द्वारा खोल दिया गया था। जहां बाबा के भक्तों ने भोर से ही दर्शन-पूजन करना शुरू कर दिया था। यह सिलसिला दिन भर चलता रहा। नगर से सटे देवकली मंदिर, नटकेश्वर मंदिर, निधरिया स्थित पंच मंदिर, मिड्ढा स्थित शिव मंदिर एवं परिखरा स्थित शिव मंदिर, हनुमानगंज स्थित कपलेश्वार नाथ मंदिर पर शिव भक्तों ने पूजन अर्जन किया।
रसड़ा स्थित श्रीनाथ मंदिर व लखनेश्वर डीह, दिउली स्थित बाबा बालखंडी नाथ, छितौनी स्थित छितेश्वर नाथ, असेगा स्थित शोकहरण नाथ, कारो स्थित कामेश्वर नाथ, कोटवा स्थित बाबा मुक्ति नाथ, भड़सर स्थित दु:खहरण नाथ, ब्यासी स्थित हरिहर नाथ, सहतवार स्थित पंच मंदिर, बड़सरी स्थित अवनी नाथ मंदिर, नगवा स्थित नागेश्वर नाथ, इब्राहिमपट्टी स्थित अवधुतेश्वर नाथ, बांसडीह कस्बा स्थित बाबा भुटेश्वर नाथ व रघुवेश्वर नाथ, थम्हनपुरा स्थित बाबा धर्मेश्वर नाथ मंदिर पर भक्तों ने वेलपत्र, भांग, धतूरा, गंगाजल, दूध, फूल-माला, चंदन व प्रसाद चढ़ाकर परिवार के मंगलमय की कामना की। इस दौरान श्रद्धालुओं के हर-हर महादेव के जयघोष व घंट-घड़ियाल से परिसर शिवमय हो गया। इस दौरान पुरुष की अपेक्षा महिलाओं की भीड़ काफी रही। उधर, कांवरियों का जत्था बाबा बालेश्वर नाथ एवं भृगु बाबा का दर्शन करने के बाद देवघर के लिए रवाना हुआ।
दयाछपरा: क्षेत्र के जालंधर बाबा शिव मंदिर, मठिया, चिंतामणि राय के टोला स्थित केसरीदास बाबा के कुटि पर तथा बाबा धाम सुभनथही स्थित ब्रह्मलीन संत इसानानंद सरस्वती पशुपति बाबा आश्रम पर भोर से ही श्रद्धालु नर-नारियों का हुजूम उमड़ पड़ा। भक्तों ने भोर में गंगा नदी में आस्था की डुबकी लगाकर गंगाजल से बाबा बालेश्वर नाथ एवं भृगु बाबा का जलाभिषेक कर पूजन-अर्चन कर परिवार के सुख-समृद्धि की कामना की।