बलिया। पर्यावरण के प्रति घोर लापरवाही कर केंद्र सरकार गंगा एवं उसकी सहायक नदियों के अस्तित्व दांव पर लगाकर राष्ट्र को पश्चिमी संस्कृति का आधुनिक संस्कार बना दिया है। विकास तथा आर्थिक प्रगति का यूरोपीय माडल प्रकृति को मंजूर नहीं है। यही कारण है कि चुनौतियों से जूझता अपना भारत बेरोजगारी के स्तर पर विश्व के अन्य देशों के लिहाज से पिछड़ता जा रहा है। यह बातें गंगा मुक्ति एवं प्रदूषण विरोधी अभियान के राष्ट्रीय प्रभारी रमाशंकर तिवारी ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान कही। उन्होंने कहा कि गंगा के संरक्षण के लिए सबको मिल-जुल कर प्रयास करना होगा। ऐसे में सरकार द्वारा नमामि गंगे योजना खुद कटघरे में है। जहां केंद्र ने करोड़ो रुपये खर्च किया। फिर भी गंगा की साफ-सफाई पर कोई ध्यान नहीं दिया गया।