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जिले के 310 गांव के पानी में मानक से ज्यादा आर्सेनिक

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रख-रखाव के अभाव में खराब पड़ा रामगढ़ क्षेत्र में आईआईटी मुंबई द्वारा आर्सेनिक रिमुवल प्लांट। - फोटो : BALLIA
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जिलेबलिया। जिले के 310 गांवों के पानी में धीमा जहर (आर्सेनिक) मानक से कई गुना अधिक पाया गया है। सबसे अधिक मात्रा गंगा और सरयू नदी के बीच स्थित द्वाबा इलाके के रामगढ़ और उसके आसपास के गांवों में मिली। इस इलाके के लोग इसकी वजह से दर्जनों बीमारियों के शिकार भी हुए हैं। इससे 12 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। सैकड़ों लोग विभिन्न बीमारियों की चपेट में हैं। आर्सेनिक से निजात दिलाने के लिए जिले में पानी टंकियों के निर्माण से लेकर आर्सेनिक रिमूवल प्लांट तक लगाए गए लेकिन राहत सिर्फ कुछ दिन तक रही। देखरेख के अभाव में यह प्लांट बंद हो चुके हैं और गांवों में लोग धीमा जहर पीने को मजबूर हैं।
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जिले के बेलहरी, बैरिया, मुरली छपरा, रेवती और दुबहड़ विकास खंड के गांवों के पानी में आर्सेनिक सबसे अधिक पाया जाता है। इन ब्लाकों के लोग आर्सेनिक के कारण कई बीमारियों की जकड़ में हैं। शरीर पर उभरे दाग इनके लिए अभिशाप बन गए हैं। कइयों ने तो इस बीमारी से निजात पाने के लिए अपना सब कुछ दांव पर लगा दिया लेकिन सब कुछ चला गया, बीमारी नहीं गई। पानी में आर्सेनिक घुला होने के कारण त्वचा, फेफड़े और अन्य अंगों के कैंसर, केरोटोइस और नाड़ी तथा संतानोत्पत्ति से संबंधित गंभीर और जानलेवा बीमारियां इन्हें अपनी चपेट में ले रही हैं।
एक दर्जन से अधिक लोगों की हो चुकी मौत
रामगढ़। बीते दो दशकों में अब तक ग्राम सभा गंगापुर के तिवारी टोला के करीब एक दर्जन से अधिक लोग आर्सेनिक की जद में आने से अपनी जान गंवा चुके हैं। इसमें लाला टोला का तो पूरा कुनबा ही साफ हो गया है। अब तो हालात ये है कि अब लोग अपना नाम व रोग बताने से भी कतराते हैं, क्योंकि यहां के लोगों को शादी-विवाह में भी काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। अब यहां के लोग न तो फोटो खिंचवाने को तैयार होते हैं और न ही अपना नाम बताते हैं। आर्सेनिक से मरने वालों में तिवारी टोला के अक्षयवर पांडेय, विशुन गोंड़, कपिलमुनि पांडेय, निलम पत्नी सूर्यबली आदि का नाम शामिल है। क्षेत्र के तिवारी टोला, चौबे छपरा, राजपुर एकौना आदि गांवों में तो 70 प्रतिशत आबादी आर्सेनिक से संबंधित बीमारियों की चपेट में है।
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जिले में बननी थी 310 पानी टंकियां, बनी लगभग 150
बलिया। जिले के आर्सेनिक प्रभावित इलाकों में कुल 310 पानी टंकियों का निर्माण होना था। इसमें से लगभग 150 का निर्माण भी किया गया, लेकिन इनमें से अधिकतर शोपीस हैं। कारण कि कोई आपरेटर के अभाव में बंद है तो किसी का मोटर जला हुआ है। जलनिगम ने बाद में इन्हें ग्राम सभाओं को हैंडओवर किया और इसके बाद ही इनके बंद होने का सिलसिला शुरू हो गया। यही नहीं आईआईटी मुंबई की टीम भी आर्सेनिक प्रभावित गांवों में पहुंची और इनकी ओर से दर्जनों गांवों में आर्सेनिक रिमूूवल प्लांट लगाए गए, जो महज कुछ माह ही चले और इसके बाद बंद हो गए।
लापरवाही से लौट गए 35 करोड़ रुपये
बलिया। जनपद के आर्सेनिक प्रभावित इलाकों के लोगों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए वर्ष 2017-18 में नीर निर्मल योजना के तहत कुल 37 परियोजनाएं स्वीकृत हुई। इसमें 19 परियोजनाओं को जल निगम ने पूरा करा दिया। 18 परियोजनाओं का निर्माण शुरू तो हुआ लेकिन तय सीमा में पूर्ण नहीं हो सका। इसके लिए विश्व बैंक से 35 करोड़ की धनराशि उपलब्ध हुई थी लेकिन समय से योजना पूरी नहीं होने पर विश्व बैंक ने अपना पैसा वापस ले लिया। अब जल निगम की ओर से कहा जा रहा है कि जल जीवन मिशन के तहत इन 18 परियोजनाओं को पूरा किया जाएगा लेकिन ये कब तक पूरा होगा, यह बताने वाला कोई नहीं है।
जहां पर भी आर्सेनिक की समस्या सामने आई है, वहां पानी टंकी का निर्माण किया गया है। इसके बावजूद और भी कुछ आवश्यकता पड़ी तो जल निगम वहां पानी टंकियों का निर्माण कराएगा। जो टंकियां नहीं चल रही हैं, उनके कारणों का पता लगवाकर ठीक कराया जाएगा। - अंकुर श्रीवास्तव, अधिशासी अभियंता, जल निगम, बलिया
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