चहनियां क्षेत्र के बलुआ में बाढ़ से मां गंगा का डूबा मंदिर।
गंगा के जलस्तर में अनवरत वृद्धि का क्रम जारी है। केंद्रीय जल आयोग गायघाट के अनुसार रविवार की शाम चार बजे गंगा का जलस्तर 53.10 मीटर दर्ज की गई। साथ ही प्रतिघंटा दस सेमी का बढ़ाव बना हुआ है। जिसके चलते पचरूखिया से लगायत श्रीनगर तक कृषियोग्य जमीन निगलनी शुरू हो गई है। इसको लेकर गंगा के मुहाने पर बसे लोगों में काफी भय व बेचैनी बनी हुई है।
गंगा के जलस्तर में बढ़ोत्तरी जारी है। वहीं जनपद में बाढ़ निरोधक कार्य व बाढ़ से बचने की तैयारी बेहद सुस्त है। हर साल बाढ़ आने के बाद शासन-प्रशासन व बाढ़ विभाग हांफना शुरू कर देता है। लेकिन इस बार अच्छी मानसून के साथ बाढ़ आने की भी संभावना जताई जा रही है। इसके बावजूद बाढ़ विभाग अपने कर्तव्य के प्रति उदासीन है। जनपद के डेंजर जोनों के रूप में चिह्नित मझौंवा, पचरूखिया, हुक्म छपरा, नरदरा, भुसौला, गणेडिय़ा व इब्राहिमाबाद नौबरार, आठगांवा पर केवल बाढ़ निरोधक कार्य के नाम पर बालू से भरी बोरियों को डालकर बाढ़ रोकने का असफल प्रयास जारी रहा।
यह बात समझ में नहीं आ रहा है कि विभाग यह जानते हुए कि न तो गंगा की लहरों के सामने यह जीओ विधि का प्लेटफार्म व स्परों से बने बोल्डर ही लहरों को रोकने में अक्षम साबित हो रहे हैं। अभी-अभी तो पचरूखिया से लेकर इब्राहिमाबाद नौबरार में बालू से भरी बोरियों को डालने का काम शुरू ही हुआ था कि जलस्तर काफी तेजी से बढ़ने लगा है। जिससे काम भी बाधित हो गया।
उधर लगातार जलस्तर में वृद्धि के चलते मझौंवा पचरूखिया पर धारा की बैकरोलिंग का दबाव बढ़ता ही जा रहा है। अगर इसी तरह वृत्रि रही तो एनएच-31 भी मुश्किल में पड़ सकता है।
केंद्रीय जल आयोग गायघाट के अनुसार रविवार की शाम चार बजे गंगा का जलस्तर 53.10 मीटर दर्ज की गई। साथ ही प्रतिघंटा दस सेमी प्रति घंटे की दर से बढ़ाव जारी है।
गंगा के तेवर देख घाट के किनारे के लोग सहमे हुए हैं। सबसे ज्यादा कटान प्रभावित इलाकों के लोग चिंतित हैं। प्रशासन ने बाढ़ से बचाव के दावे किए थे लेकिन अभी तक बाढ़ चौकियों पर सक्रियता नहीं दिख रही है जबकि गंगा के तटवर्ती इलाकों की काफी जमीन बाढ़ में डूबने लगी है। जानकारों का कहना है कि मध्यप्रदेश में हुई बारिश के चलते गंगा में और वृद्धि तय है। उधर घाघरा में भी पानी बढ़ने लगा है और तटवर्ती लोग चिंतित हैं।