बैरिया क्षेत्र के मधुबनी गांव निवासी मृतक मुनीब साहनी के रोती बिलखती परिवार की महिलाएं।
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बैरिया। गरीबी और बेबसी ने बैरिया थाना क्षेत्र के मधुबनी निवासी मुनीब साह (30) को जीविकोपार्जन के लिए गुजरात पहुंचा दिया था। साड़ी मिल बंद हुई तो वह दाने-दाने को मोहताज हो गया। पत्नी ने जेवर बेचकर पैसे का इंतजाम किया। पति-पत्नी बस से गुजरात से बलिया आ रहे थे कि रास्ते में बुधवार को मुनीब साह बस में ही दम तोड़ दिया।
पांच भाइयों में सबसे छोटे मुनीब साह गुजरात के सूरत के पास बुधना में एक साड़ी मिल में काम करता था। साथ में उसकी पत्नी भी रहती थी। लॉकडाउन के कारण साड़ी मिल बंद होने से मुनीब की कमाई का जरिया खत्म हो गया। कुछ दिनों तक कमाए हुए पैसे से पति-पत्नी ने इस उम्मीद में गुजर बसर किया। यह सोचकर कि मिल खुलेगी तो फिर उनकी परिवार की गाड़ी चलने लगेगी। इसी इंतजार में पास के पैसे समाप्त हो गए। कई दिन फांकाकसी के बाद पत्नी ने अपना जेवर बेचकर किराया का इंतजाम कर गुजरात से निकल पड़े। बस से आते समय रास्ते में ही मुनीब की मौत हो गई। बगल में बैठी पत्नी सोची कि मुनीब सो रहे हैं। बलिया आने पर जब पत्नी प्रियंका ने मुनीब को उठाना चाहा तो देखा कि उनके प्राण पखेरू उड़ चुके हैं। पत्नी बिल्ख कर रोने लगी। आसपास के लोग इकट्ठा हो गए। चिकित्सीय टीम की देखरेख में पुलिस व चिकित्सीय टीम ने शव को कब्जे में ले लिया। पत्नी प्रियंका ने बताया कि प्रशासन के लोग कह रहे हैं कि दो दिन जांच में लगेंगे, उसके बाद ही शव मिल सकेगा। प्रियंका की मानें को लॉकडाउन के बाद अक्सर हम लोगों को भूखे रहना पड़ता था।