दो परीक्षाओं में से युवा एक ही परीक्षा दे पाएंगे।
यूपी बोर्ड की शिक्षा व्यवस्था कमोवेश सीबीएसई बोर्ड से काफी सस्ती है। साथ ही सीबीएसई बोर्ड की अपेक्षा यूपी बोर्ड के विद्यालयों की संख्या ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक है। जिसके चलते ग्रामीण अंचल के बच्चों का रूझान इस ओर कुछ ज्यादा हो रहा है।
वहीं शहरी क्षेत्र के बच्चे महंगी शिक्षा के बाद भी सीबीएसई पैटर्न की पढ़ाई की ओर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं। यूपी बोर्ड के परीक्षा परिणाम पर गौर किया जाय तो उसमे मेरिट सूची में स्थान पाने वाले बच्चों में से ज्यादा बच्चे ग्रामीण अंचलों से ही आते हैं।
इसके कई कारण हैं। जिसमें यूपी बोर्ड की सस्ती शिक्षा भी हैं। यही नहीं ग्रामीण अंचलों में सीबीएसई पैटर्न के विद्यालयों की कमी का होना है। जबकि ग्रामीण अंचलों में यूपी बोर्ड के विद्यालयों की भरमार है। शायद यही कारण है कि गांव के गरीब लोग अपने बच्चों को यूपी बोर्ड में पढ़ाने पर बल देते हैं।
वहीं शहरी क्षेत्र में यूपी बोर्ड के साथ-साथ सीबीएसई के भी तमाम विद्यालय हैं। शहर के लोग अपने बच्चों को सीबीएसई बोर्ड के विद्यालयों में पढ़ाने मे अपने को सक्षम महसूस करते हैं। शहरी क्षेत्र के बच्चों के पहुंच में विद्यालय होने के कारण वे सीबीएसई विद्यालयों की तरफ बढ़ते हैं। शहरी क्षेत्र के लोग कुछ ज्यादा ही जागरूक हैं।
उनकी सोच है कि इंटरमीडिएट परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद अधिकतर प्रतियोगी परीक्षाएं सीबीएसई पैटर्न पर ही होती है। जिसके कारण सीबीएसई के विद्यालयों में पढ़ाने से प्रतियोगी परीक्षाओं में मदद मिलती है।