बलिया। वसंत पंचमी बदलते मौसम का एहसास ही नहीं बल्कि हमारे जीवन में नवस्फूर्ति, उमंग, स्नेह एवं आनंद का अनुभव भी कराती है। साथ ही संदेश भी देती है कि दु:ख के बाद एक दिन सुख का आगमन भी होता है।
उक्त बातें गीतकार बब्बन विद्यार्थी ने रविवार को अखार स्थित मीडिया सेंटर पर पत्रकारों से बातचीत के दौरान कही। कहा, वसंत ऋतु की खास विशेषता खुशबू बिखेर रहे पुष्पों पर मंडराते भौंरों का समूह और कोयल की कूक है। सरसों के पीले फूल और धरा की हरियाली जहां प्रकृति के स्वर्गमयी होने का आभास कराते हैं। वहीं महुये एवं आम्रमंजरी की मादक गंध से प्रकृति बौराई हुई सी प्रतीत होती है। बब्बन विद्यार्थी ने कहा कि हमारे देश में वसंत पंचमी का बड़ा ही महत्व है। इस दिन सरस्वती पूजन के साथ ही रंगोत्सव की शुरुआत होती है। गांव-गांव लोग झाल, डफ और मजीरा लेकर ढोलक की थाप पर फाग का ताल ठोकते हैं। हमें अपनी इस परंपरा को हर हाल में सहेजकर रखना होगा। विद्यार्थी ने अपनी गीत- सरिसों के पियरी संवरिया के शोभे...एवं आईल वसंत बहार बोलो सारा रा रा... सुनाकर उपस्थित लोगों को भाव विभोर कर दिया। इस मौके पर विश्वनाथ पांडेय, अवध बिहारी चौबे, उमाशंकर पाठक, डॉ. सुरेशचंद्र प्रसाद, पन्नालाल गुप्ता, श्रीभगवान साहनी आदि रहे।