वहीं, निर्दलीय संजय उपाध्याय के लिए पूर्व मंत्री सपा के कद्दावर नेता नारद राय ने अपनी साख दांव पर लगा रखीं हैं। जीत-हार से सपा हाईकमान के फैसले से इधर जाकर निर्दलीय की मदद करने वाले नारद राय की राजनीति जीवन का भविष्य भी दांव पर है। इसके अलावा, सपा के अधिकृत उम्मीदवार लक्ष्मण गुप्ता के लिए पूर्व विधायक मंजू सिंह, राम इकबाल सिंह के अलावा जिला अध्यक्ष राजमंगल यादव ने अपनी प्रतिष्ठा दांव पर लगाई थी। इसलिए इस सीट पर हार-जीत भी काफी मायने रखती है।
गुरुवार को 12 नगर निकायों में अध्यक्ष पद के लिए 134 और सदस्य पद के लिए 815 प्रत्याशियों का भविष्य मतपेटियों में कैद हो गया है। चुनाव नतीजे ही कद्दावरों की मजबूत पकड़ व जनता के दिलों में बनी जगह को साबित करेंगे।
गुरुवार शाम मतदान समाप्त होने के बाद प्रत्याशी, समर्थक और आम मतदाताओं की निगाह अब मतगणना परिणाम पर टिकी हुईं हैं। इससे पहले सभी हार जीत का गुणा भाग लगा रहे हैं। हर कोई अपने-अपने वार्ड में पड़े मतदान प्रतिशत के आधार पर जीत हार की बाजी लगा रहा था। कइयों की नजर पार्टी प्रत्याशियों के अलावा बागियों के वोटों पर भी है। उन्हें आभास है कि निर्दलीय के वोटों का ग्राफ बढ़ा तो उनकी राह में रोड़ा अटक सकता है। इसे लेकर लोगों बीच जमकर बहसबाजी भी हो रही थी। इसके अलावा बूथ की दिनभर गतिविधियों के बारे में प्रत्याशियों के कार्यालय पर देर शाम तक चर्चा होती रही।