जिसका डर था बेदर्दी वही बात हो गई... यूं तो ये गाने के बोल हैं लेकिन बैरिया विधानसभा क्षेत्र में सटीक बैठ रहे हैं। विधानसभा क्षेत्र का परिणाम घोषित होने पर तमाम राजनीतिक गलियारों के जानकार लोग पहले से ही कह रहे थे कि सामान्य वर्ग के दो लोगों की लड़ाई में तीसरा और वर्ग वाला बाजी मार ले जाएगा।
क्योंकि तमाम परिस्थितियों के बावजूद यादव मत व मुस्लिम मत में बंटवारा नहीं हो पाया है। भाजपा से टिकट नहीं मिलने पर सुरेंद्र सिंह वीआईपी की नाव चुनाव चिह्न से ताल ठोका। सुरेंद्र सिंह की नाव न सिर्फ खुद डूबी बल्कि कमल को भी डुबो दिया। जिसके कारण आज समाजवादी पार्टी का परचम इस क्षेत्र में लहरा रहा है।
यहां सामान्य वर्ग के मतदाताओं की संख्या लगभग 46 फीसदी है। जबकि ओबीसी दलित और मुस्लिम मिलाकर 54 फीसदी है। लेकिन आपसी खींचातानी के चलते सपा यहां बाजी मार ले गई।
बहुजन समाज पार्टी के प्रत्याशी पूर्व विधायक सुभाष यादव को बसपा ने यह सोचकर टिकट दिया था कि दलित मतों के अलावा कुछ यादव व कुछ मुस्लिम मतों के सहारे चुनावी नाव की वैतरणी को पार हो जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इन वर्गों ने बसपा प्रत्याशी सुभाष यादव को नकार दिया और एकजुट होकर सपा को मतदान किया फलस्वरूप सपा प्रत्याशी के माथे जीत का सेहरा बंध गया।
पुराने अखाड़े में उतरे सभी नए धुरंधरों को पछाड़ते हुए सुभासपा के हंसू राम ने जनपद की एकमात्र सुरक्षित विधानसभा बेल्थरारोड के सिरमौर बने। चुनाव के दौरान उनके बाहरी होने का मुद्दा जोरशोर से उठाया गया। हालांकि छट्ठू राम ने दोपहर तक विधानसभा सीट पर बढ़त बनाए रखी, लेकिन दोपहर बाद सुभासपा प्रत्याशी ने बाजी पलटी तो फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा और अंत में भाजपा के छट्ठू राम को 5511 मतों से मात दी। बसपा यहां पर तीसरे नंबर पर रही। बसपा के साथ ही 11 प्रत्याशियों की जमानत यहां जब्त हो गई।
चुनाव से पहले सपा छोड़ कर पूर्व विधायक गोरख पासवान भी भाजपा में शामिल हुए, लेकिन कोई भी युक्ति भाजपा प्रत्याशी के काम नहीं आई। मतगणना के दौरान सुबह से लेकर दोपहर तक कई राउंड में भाजपा यहां से आगे रही। दोपहर से सुभासपा प्रत्याशी ने तेजी पकड़ी। इसके बाद वो लगातार अपने जीत का अंतर बढ़ाते रहे। बसपा यहां से अन्य सीटों के मुकाबले अच्छा लड़ी और तीसरे नंबर पर रही।
बेल्थरारोड विस का एक पुराना मिथक भी इस बार टूट गया। तीन जिलों के सीमा पर स्थित बेल्थरारोड विधानसभा सीट पर मिथक था कि जिस पार्टी का प्रत्याशी जीतता है सूबे में उसी की सरकार बनती है। पिछले तीन दशक के इतिहास में यही होता रहा था। बृहस्पतिवार को आया परिणाम सबको चौंका गया। इस सीट पर सपा प्रत्याशी हंसू राम ने भाजपा के प्रत्याशी छठ्ठू राम को पछाड़कर जीत दर्ज करते हुए तीन दशकों से चले आ रहे मिथक को तोड़ दिया।