भाजपा ने रविवार देर रात बलिया की दो विधानसभा सीटों से अपने प्रत्याशियों की घोषणा कर दी। इसमें पार्टी के फायरब्रांड नेता एवं विधायक सुरेंद्र सिंह का टिकट काट दिया गया। वहीं बलिया नगर से विधायक राज्यमंत्री आनंद स्वरूप शुक्ला की सीट बदल दी गई। बलिया नगर से अब पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष दयाशंकर सिंह और बैरिया विधानसभा से राज्यमंत्री आनंद स्वरूप शुक्ला को प्रत्याशी घोषित किया गया है।
बैरिया से टिकट कटने के बाद सोशल मीडिया के माध्यम से वर्तमान विधायक सुरेंद्र सिंह ने आठ फरवरी को नामांकन का एलान किया था। सोमवार को फोन पर उनसे हुई वार्ता में उन्होंने कहा कि नौ फरवरी को नामांकन करेंगे। इससे पहले उनके लखनऊ में जनता दल यूनाइटेड (जदयू) में शामिल होने की भी सूचनाएं आ रही हैं। हालांकि उन्होंने कहा इस बारे में मंगलवार को घोषणा की जाएगी कि वो किस पार्टी में जा रहे हैं।
भाजपा विधायक सुरेंद्र सिंह
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टिकट कटने के संबंध में सुरेंद्र सिंह ने साफ कहा कि उनका टिकट काटने में सांसद वीरेंद्र सिंह मस्त और भू-माफियाओं का हाथ है। टिकट कटने में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का कोई दोष नहीं है। कहा कि भू-माफियाओं को सफल नहीं होने दूंगा। गरीबों और मेला की भूमि को कतई कब्जा नहीं करने दूंगा।
भाजपा लड़ाई में नहीं, सपा से होगा मुकाबला
फोन पर हुई वार्ता में सुरेंद्र सिंह ने कहा कि बैरिया विधानसभा सीट से भाजपा लड़ाई में है ही नहीं, यहां मेरा मुकाबला सीधे सपा प्रत्याशी के साथ होगा।
इधर, बलिया नगर सीट से नागेंद्र पांडेय ने विद्रोह का बिगुल फूंक दिया। उन्होंने नौ फरवरी को नामांकन का एलान किया है। ऐसे में भाजपा के पास विद्रोह को थामना और अपनी सीट को बचाना चुनौती होगी। बांसडीह से भी भाजपा की सहयोगी निषाद पार्टी से केतकी सिंह के प्रत्याशी घोषित होने के बाद एक और दावेदार कनक पांडेय नाराज हो गए हैं। हालांकि उन्होंने अपने पत्ते नहीं खोले हैं। इस लिहाज से देखा जाए तो बागी बलिया में एक बार फिर से सियासी बगावत के स्वर ऊंचे हो रहे हैं।
अपने बयानों के चलते सुर्खियों में रहने वाले बैरिया विधायक सुरेंद्र सिंह की पहचान क्षत्रिय नेता के रूप में भी है। बैरिया थाना क्षेत्र में हुए दुर्जनपुर कांड के बाद जिस तरीके से क्षत्रिय समाज सुरेंद्र सिंह के पक्ष में लामबंद हुआ था। उस देखते हुए ये तो तय है कि कम से कम बैरिया विधानसभा में क्षत्रिय मत प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि भाजपा पदाधिकारियों का कहना है कि क्षत्रिय उनके परंपरागत वोटर हैं। कोई खास असर नहीं पड़ेगा।