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UP Chunav 2022: टिकट घोषित होते ही बलिया की दो सीटों पर बगावत, भाजपा विधायक सुरेंद्र सिंह के जदयू में शामिल होने की अटकलें तेज

Mon, 07 Feb 2022 03:36 PM IST
उत्पल कांत अमर उजाला नेटवर्क, बलिया

सार

भाजपा की ओर से प्रत्याशियों की घोषणा के बाद बलिया जिले में सियासी पारा चढ़ गया है।  बैरिया विधायक सुरेंद्र सिंह को टिकट नहीं मिला है। अमर उजाला से बातचीत में सुरेंद्र सिंह ने कहा कि मंगलवार को घोषणा की जाएगी कि वो किस पार्टी में जा रहे हैं।  
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बैरिया विधायक सुरेंद्र सिंह। - फोटो : सोशल मीडिया।
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विस्तार
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भारतीय जनता पार्टी ने बलिया की सभी सीटों पर अपनी स्थिति साफ करते हुए रणबांकुरों को चुनाव मैदान में उतार तो दिया, लेकिन अपनों ने ही घोषित प्रत्याशियों के खिलाफ चुनाव लड़ने का एलान कर पार्टी के रणनीतिकारों को पशोपेश में डाल दिया। पार्टी को सबसे ज्यादा परेशानी है बैरिया सीट पर।

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टिकट कटने के बाद विधायक एवं फायरब्रांड नेता सुरेंद्र सिंह के बगावती तेवर पार्टी के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकते हैं। उनके जदयू में शामिल होने की अटकलें सियासी गलियारों में चल रही है। अमर उजाला से बातचीत में सुरेंद्र सिंह ने कहा कि मंगलवार को पता चल जाएगा कि वो किस पार्टी के साथ जा रहे हैं।

इधर, बलिया नगर सीट से नागेंद्र पांडेय भी नामांकन करने की घोषणा कर चुके हैं। बांसडीह में कनक पांडेय भी नाराज दिख रहे हैं। हालांकि उन्होंने समर्थकों के साथ बैठक के बाद स्थिति स्पष्ट करने की बात कही है। बदली हुई परिस्थितियों में अब सबकी नजरें बैरिया और बलिया से घोषित होने वाले सपा प्रत्याशियों पर टिकी है।
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नौ को नामांकन करेंगे सुरेंद्र सिंह

भाजपा ने रविवार देर रात बलिया की दो विधानसभा सीटों से अपने प्रत्याशियों की घोषणा कर दी। इसमें पार्टी के फायरब्रांड नेता एवं विधायक सुरेंद्र सिंह का टिकट काट दिया गया। वहीं बलिया नगर से विधायक राज्यमंत्री आनंद स्वरूप शुक्ला की सीट बदल दी गई। बलिया नगर से अब पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष दयाशंकर सिंह और बैरिया विधानसभा से राज्यमंत्री आनंद स्वरूप शुक्ला को प्रत्याशी घोषित किया गया है।  

बैरिया से टिकट कटने के बाद सोशल मीडिया के माध्यम से वर्तमान विधायक सुरेंद्र सिंह ने आठ फरवरी को नामांकन का एलान किया था। सोमवार को फोन पर उनसे हुई वार्ता में उन्होंने कहा कि नौ फरवरी को नामांकन करेंगे। इससे पहले उनके लखनऊ में जनता दल यूनाइटेड (जदयू) में शामिल होने की भी सूचनाएं आ रही हैं। हालांकि उन्होंने कहा इस बारे में मंगलवार को घोषणा की जाएगी कि वो किस पार्टी में जा रहे हैं।  

टिकट काटने में सांसद वीरेंद्र सिंह मस्त और भू-माफियाओं का हाथ

भाजपा विधायक सुरेंद्र सिंह - फोटो : अमर उजाला
टिकट कटने के संबंध में सुरेंद्र सिंह ने साफ कहा कि उनका टिकट काटने में सांसद वीरेंद्र सिंह मस्त और भू-माफियाओं का हाथ है। टिकट कटने में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का कोई दोष नहीं है। कहा कि भू-माफियाओं को सफल नहीं होने दूंगा। गरीबों और मेला की भूमि को कतई कब्जा नहीं करने दूंगा।
भाजपा लड़ाई में नहीं, सपा से होगा मुकाबला 
फोन पर हुई वार्ता में सुरेंद्र सिंह ने कहा कि बैरिया विधानसभा सीट से भाजपा लड़ाई में है ही नहीं, यहां मेरा मुकाबला सीधे सपा प्रत्याशी के साथ होगा। 

जदयू में शामिल होने की अटकलें क्यों

बिहार की सत्ताधारी पार्टी जदयू का यूं तो यूपी में कोई खास जनाधार नहीं है, लेकिन यदि सुरेंद्र जदयू में शामिल होते हैं तो तीन तरफ से बिहार की सीमा से सटी बैरिया विधानसभा में इसका लाभ उन्हें मिल सकता है। 
पढ़ेंः  पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र की 6 सीटों पर भाजपा का पुराने चेहरों पर दांव, दो सीटों पर चर्चा जारी

विरोध को थामना भाजपा के लिए बनेगी चुनौती

इधर, बलिया नगर सीट से नागेंद्र पांडेय ने विद्रोह का बिगुल फूंक दिया। उन्होंने नौ फरवरी को नामांकन का एलान किया है। ऐसे में भाजपा के पास विद्रोह को थामना और अपनी सीट को बचाना चुनौती होगी। बांसडीह से भी भाजपा की सहयोगी निषाद पार्टी से केतकी सिंह के प्रत्याशी घोषित होने के बाद एक और दावेदार कनक पांडेय नाराज हो गए हैं। हालांकि उन्होंने अपने पत्ते नहीं खोले हैं। इस लिहाज से देखा जाए तो बागी बलिया में एक बार फिर से सियासी बगावत के स्वर ऊंचे हो रहे हैं। 
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क्षत्रिय वोट बैंक पर पड़ सकता है असर

बीजेपी
अपने बयानों के चलते सुर्खियों में रहने वाले बैरिया विधायक सुरेंद्र सिंह की पहचान क्षत्रिय नेता के रूप में भी है। बैरिया थाना क्षेत्र में हुए दुर्जनपुर कांड के बाद जिस तरीके से क्षत्रिय समाज सुरेंद्र सिंह के पक्ष में लामबंद हुआ था। उस देखते हुए ये तो तय है कि कम से कम बैरिया विधानसभा में क्षत्रिय मत प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि भाजपा पदाधिकारियों का कहना है कि क्षत्रिय उनके परंपरागत वोटर हैं। कोई खास असर नहीं पड़ेगा।
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