पुलिस ने बताया कि निर्भय नारायन सिंह ने आर्थिक लाभ के लिए उक्त प्रश्नपत्र अन्य लोगों को भी दिया। वहीं राजीव प्रजापति ने प्रश्नपत्र अपने मोबाइल के पीडीएफ स्कैनर एप से स्कैन कर सोशल मीडिया प्लेटफार्म के माध्यम से अन्य लोगों को आर्थिक लाभ के लिए बेचे जाने की बात कबूल की है। यह प्रश्नपत्र उनके पास से बरामद मोबाइल फोन में भी मिला है।
पुलिस का दावा है कि प्रश्नपत्र खरीदने वाले कई व्यक्तियों ने आर्थिक लाभ के लिए अन्य लोगों को बेचे जाने की बात स्वीकार की है। इस बात की पुष्टि उनके बैंक अकाउंट और पेटीएम ट्रांजैक्शन के स्क्रीनशॉट जो इनके मोबाइल में पाए गए हैं उससे भी हुई है।
अन्य की जांच की जा रही है। मामले को हल करने के लिए सात टीमों का गठन किया गया था। अब तक मामले में चार कॉलेज प्रबंधक, तीन प्रधानाचार्य, 10 शिक्षक, पांच प्राइवेट कोचिंग शिक्षक के साथ तीन विद्यालय क्लर्क व अन्य शामिल हैं।
इस मामले में अब तक डीआईओएस बृजेश कुमार मिश्रा, नगरा से बृजभान यादव, जय प्रकाश यादव, जनार्दन यादव, सुनील कुमार, राकेश यादव, वरुण सिंह, अनमोल यादव, जय प्रकाश पांडेय, अमित यादव, विशाल यादव, अभिषेक यादव, अनूप चौहान, रजनीकांत यादव, आनंद नरायन चौहान उर्फ मुलायम चौहान, मनीष चौहान, विकास राय, प्रशांत राय, बृजेश चौहान, भानु प्रताप सिंह, निर्भय नारायन सिंह, राजू उर्फ राजीव प्रजापति, अविनाश गौतम, नीरज सिंह, सुनील, कमलेश यादव, चंदन चौहान, ओमकार नाथ, शुभेन्द्र यादव, अहमद रजा, ओम प्रकाश वर्मा, सुधीर कुमार यादव, सुजीत वर्मा, शाहिद अंसारी, अरविंद कुमार, अनिल कुमार गोंड़, अनूप यादव, नरेंद्र प्रसाद गुप्ता, राजेश गुप्ता, अरविंद कुमार वर्मा, मनिंद्र कुमार गुप्ता आदि गिरफ्तार किए गए हैं।
पेपर लीक मामले में पत्रकारों की गिरफ्तारी का चौतरफा विरोध तेज हो गया है। अखिल भारतीय पत्रकार सुरक्षा समिति ने रविवार को मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। ऐसा न होने पर बलिया प्रशासन के खिलाफ पूरे प्रदेश में आंदोलन शुरू करने का एलान किया।
समिति के प्रदेश अध्यक्ष अजय प्रताप नारायण सिंह ने कहा कि पेपर लीक मामले में पत्रकारों को घसीटना लोकतंत्र पर हमला है। पत्रकार का काम खबरों को उजागर करना है। अगर बलिया के पत्रकारों ने पेपर लीक मामले को उजागर किया तो क्या गुनाह कर दिया। वहीं, राष्ट्रीय सचिव सुनील चौधरी ने कहा कि यूपी में पत्रकारों की दशा दिन पर दिन दयनीय होती जा रही है।
पत्रकारों की गिरफ्तारी मीडिया पर लगाम लगाने की कोशिश है। गिरफ्तार साथियों की रिहाई नहीं हुई तो प्रदेश भर में एक बड़ा आंदोलन खड़ा होगा। राष्ट्रीय प्रवक्ता मनोज सिंह ने प्रशासन की कार्रवाई को दुर्भावनापूर्ण बताते हुए गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मामले में हस्तक्षेप की मांग की। कहा कि पत्रकारों को बलि का बकरा बनाया जा रहा है।