रसड़ा कस्बा निवासी अशोक कुमार गुप्त सहित पांच कारोबारियों का अपहरण मेघालय प्रांत में उल्फा उग्रवादियों द्वारा 14 माह पहले कर लिया गया था। अभी तक अपहृत लोगों को उग्रवादियों के चंगुल से नहीं छुड़ाया गया है।
पीड़ित परिवार के लोग गृहमंत्री राजनाथ सिंह सहित कई केंद्रीय मंत्रियों से गुहार कर चुके हैं, लेकिन इस दिशा में आज तक केंद्र सरकार ने कोई ठोस पहल नहीं किया है। पीड़ित परिवार के लोगों ने एक बार फिर जिलाधिकारी से गुहार लगाने के साथ ही शनिवार को नैतिक पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व न्यायाधीश चंद्रभूषण पांडेय को पत्रक सौंपा है।
पत्रक में कहा गया है कि रसड़ा कोतवाली के बैजलपुर निवासी मानिकचंद्र गुप्ता और रसड़ा कस्बा निवासी अशोक कुमार गुप्ता, मिट्ठू गुप्ता, मिट्ठू गोंड एवं संजय गोंड के अलावा बिहार के बक्सर जिले डुमरांव निवासी सुनील गुप्ता मेघायलय के तुर्रा बाजार में रहकर अनाज का कारोबार करते थे।
25 मार्च 2014 को उक्त पांचों कारोबारियों का अपहरण गारो नेशनल बिब्रेशन आर्मी के सदस्यों ने तुर्रा बाजार से रोहतांग जा रहे वेस्ट गारो हिल्स के रंभा गिरि के पास कर लिया था।
साथ ही 50 लाख की फिरौती मांगी गई थी। यही नहीं धमकी दिया गया था कि यदि किसी ने पुलिस को बताया तो अपहृत कारोबारियों की हत्या कर दी जाएगी। पीड़ित परिवार के लोगों ने कुछ परिचितों के कहने पर उन्हीं के माध्यम से अपहर्ताओं को आपसी सहयोग से 10 लाख रुपया फिरौती भी दिया, लेकिन अपहर्ताओं ने नहीं छोड़ा।
महिला पीड़िताओं ने अपने पतियों को छुड़ाने के लिए अब तक गृहमंत्री से लेकर प्रधानमंत्री तक का दरवाजा खटखटा चुकी हैं। यही नहीं पीड़ित परिवार प्रधानमंत्री के वाराणसी स्थित कार्यालय पर भी धरना, प्रदर्शन कर चुकी हैं। ऐसे में अपहृत कारोबारियों की पत्नियां अपने बच्चों को लेकर पतियों के इंतजार में भटक रही हैं।