मनियर कस्बा स्थित परशुराम मंदिर में स्थापित भगवान विष्णु और परशुराम जी प्रतिमा।
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बलिया। अक्षय तृतीया को भगवान परशुराम की जयंती सामाजिक दूरी का पालन करते हुए मनाई गई। मनियर कस्बा स्थित प्राचीन परशुराम मंदिर में शनिवार को सामाजिक दूरी का पालन करते हुए भगवान परशुराम की पारंपरिक रूप से पूजा की गई।
परशुराम जयंती पर मंदिर में भीड़ इकट्ठी न हो। इसके लिए सुबह से ही पुलिसकर्मी तैनात रहे। लोगों ने अपने-अपने घरों में ही भगवान परशुराम की पूजा की और दूध और फूल अर्पित किया। शैक्षणिक, औद्योगिक एवं सेवा संस्थान की ओर से सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए शनिवार को भगवान परशुराम की जयंती मनायी गई। इस दौरान सभी ने उनके चित्र पर माल्यार्पण कर नमन किया। संस्था की प्रबंधक डॉ. प्रीति ने बताया कि त्रेतायुग में अत्याचारियों से मुक्ति दिलाने के लिए भगवान विष्णु ने श्रीराम अवतार लेने तक सतयुग और त्रेतायुग के संधि काल के दौरान भगवान परशुराम अवतार को व्यवस्था बनाए रखने का उत्तरदायित्व दिया। सतयुग-त्रेता के संधि काल में पीड़ितों और असहायों की रक्षा एवं उनके उत्थान का बीड़ा भगवान परशुराम ने उठाया। डॉ. चंद्रशेखर उपाध्याय ने कहा कि भगवान परशुराम ने असहायों और असमर्थों को अपने पौरुष से संबल प्रदान किया। उनका जीवन आत्मनिर्भरता का एक अद्भुत उदाहरण है। इस मौके पर परितोष उपाध्याय, विद्यासागर दुबे, आनंद मणि दूबे, गिरिजा शंकर पाठक, बलिराम मिश्रा, मनमोहन पांडेय, पीयूष दुबे, परशुराम मिश्रा आदि रहे। उधर, विनायक सामाजिक महिला सेवा संस्थान की प्रबंधक संध्या पांडेय ने घर में ही भगवान परशुराम की पूजा अर्चना की।