शिक्षा के लिए लोन लेना इतना आसान नहीं है जितना बताया जाता है। लोन लेने की जटिल प्रक्रिया तथा बैंकर्स की असंवेदनशीलता के चलते हजारों छात्र उच्चशिक्षा से वंचित हो रहे हैं। लोन से पढ़ाई करने वाले छात्र कम पैसों की नौकरी मिलने से लोन की भरपाई करने में अपने को अक्षम पा रहे हैं जिससे अधिकतर बच्चे कुण्ठा के शिकार हो रहे हैं।
पिता की माली हालत ठीक नहीं होने पर उनके बच्चे को एजुकेशन लोन मिल पाना काफी मुश्कि ल है।
उच्च शिक्षा या अन्य तरह की पढ़ाई के लिए बैंकर्स लोन देने से पहले उसके अभिभावक की माली हालत की जांच पड़ताल जरूर करते हैं। अभिभावक की स्थाई संपति या नौकरी नहीं होने पर उसके बच्चे को एजुकेशनल लोन लेना आसान नहीं है। असल में बच्चे को मिलने वाला एजुकेशनल लोन उसके पिता को ही मिलता है। फुलप्रुफ गारंटी मिलने के बाद ही बैंक एजुकेशनल लोन जारी कर रहा है। यह किसी एक बैंक की बात नहीं है अपितु ऐसे तमाम बैँक हैं जो एजुकेशनल लोन के नाम पर अभिभावकों के ब्योरा तलब करते हैं। जबकि एजुकेशनल लोग बच्चे के नाम पर मिलनी चाहिए। जबकि ऐसा नहीं होता है। बच्चे की पढ़ाई के दौरान ही लोन का ब्याज शुरू हो जाता है।
लोन का ब्याज भी आम ब्याज दर से कम नहीं होता है। विभागीय जानकारी के अनुसार लोन का ब्याज नौ फीसद से किसी भी बैंक में कम नहीं है। छात्रों को ब्याज की भारी भरकम धनराशि बैंक को वापस करनी पड़ती है। हालांकि कुछ ऐसे भी छात्र हैं जिन्हें लोन से पढने के बाद अच्छी नौकरी नहीं मिलती है जिससे उन्हें लोन अदा करने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। एजुकेशन लोनिंग की व्यवस्था होने के बावजूद गरीब तबके के छात्र लोनिंग से बचते हैं।