बलिया। बाढ़ के समय गंगा नदी से माल्देपुर के सामने कटान ने भारी क्षति पहंुचाई थी। इसको देखते हुए शासन ने कटानरोधी कार्य पर जोर दिया है। 15.9 करोड़ से 500 मीटर लंबा कटर बनाया जाएगा। कटर के बीच पिचिंग का भी कार्य होगा, जिससे नदी की धारा को मोड़ा जा सके। इसके लिए बोल्डर गिराए जा रहे हैं।
एक दशक पूर्व गंगा नदी एनएच-31 से चार किमी दूर बहती थी। अब मात्र 800 मीटर पर गंगा व तमसा का संगम हो गया है। दो नदियों के संगम के कारण इस स्थल पर कटान ज्यादा होती है। गंगा नदी तक जाने के लिए लोगों को पहले तमसा नदी को पार कर तीन किमी तक चलना पड़ता था। दोनों नदियों के बीच किसान खेती भी करते थे। उस समय तमसा व गंगा का मिलान शिवरामपुर घाट पर होता था, जिसे आज भी संगम तट कहा जाता है। वर्तमान समय में दोनों नदियां माल्देपुर के सामने ही मिल रही हैं।
हालत यह है कि हर वर्ष कटान से गंगा की धारा धीरे-धीरे माल्देपुर एनएच-31 के करीब आती जा रही है। कटान रोकने के लिए क्षेत्रीय जनता ने कई बार मांग की थी। इसके बाद बाढ़ विभाग ने शासन को प्रस्ताव भेजा। इसपर शासन ने धनराशि जारी की है। कटानरोधी कार्य के लिए बड़े-बड़े बोल्डर गंगा तट पर गिराए जाने लगे हैं। बोल्डर से संगम तट से 500 मीटर तक 13 कटर बनाए जाएंगे। इनके बीच में पिचिंग का भी कार्य होगा, जिससे नदी की धारा को मोड़ा जा सके।
वर्जन
मल्देपुर के सामने कटानरोधी कार्य के लिए शासन से धनराशि जारी हो गई है। इससे 13 कटर बनाने के साथ ही पिचिंग का भी कार्य किया जाएगा। फरवरी तक कार्य को पूरा कर लिया जाएगा। -संजय कुमार मिश्रा, अधिशासी अभियंता, बाढ़ खंड।