दया छपरा। विषमता को समता में जो बदल दे उसे ही शिव कहते है। देखिए शिव के परिवार में कितनी विषमताएं हैं। भगवान शिव बैल की सवारी करते हैं। उनकी धर्म पत्नी सिंह की सवारी करती हैं। एक हिंसक एक अहिंसक। एक बेटा गणेश चूहा की सवारी करता है। भगवान शिव के गले में सर्प लिपटे रहते हैं। चूहा और सर्प का सम्बन्ध भी सर्व विदित है।
उक्त बाते ग्राम पंचायत जगदेवा के चिंतामणी राय के टोला ब्रह्मलीन सन्त केसरी दास बाबा की कुटी पर आयोजित नव दिवसीय नवाह परायण यज्ञ में प्रवचन के क्रम में बक्सर के हिमांशु जी महाराज ने कही। बताया कि सर्प जब चूहा को देखता है तो प्रयास तो यही करता है कि चूहा को हम खा जाएं। एक बेटा मोर पर बैठता है। उसका प्रयास रहता है कि हम सर्प को ही अपना ग्रास बनाए।
कारण है कि भगवान शिव अपने परिवार के सभी सदस्यों को लेकर एक साथ भजन और भोजन करते है। जिसके परिवार में लोग एक साथ मिलकर भजन और भोजन करना सीख जायेंगे उनके परिवार की भी विषमता, समता में बदल जाएगी। बताया कि एक बात ध्यान रखना है भजन और भोजन दोनों शब्दों में मात्र तीन ही अक्षर हैं, लेकिन भोजन में एक मात्रा है। इसका अभिप्राय यह है कि भोजन मात्रा में होना चाहिए और भजन में कोई मात्रा अर्थात कोई सीमा नहीं होनी चाहिए। कथा देर रात तक चलती रही। जहां श्रद्धालु नर-नारी कथा रूपी सागर में गोता लगाते रहे।