बलिया। मऊ-फेफना फोरलेन परियोजना को भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की तरफ से पहले ही स्वीकृति दी जा चुकी है। करीब 56 किलोमीटर लंबा मार्ग एनएच-128 बी के बन जाने से मऊ-बलिया के साथ आजमगढ़ मंडल के बीच बलिया का सीधा जुड़ाव हो जाएगा। इससे यात्रा का समय काफी कम होगा। अब डीपीआर में संशोधन किया जा रहा है। अब तीन आरओबी और दो बाइपास बनाया जाएगा। पहले पांच आरओबी बनने थे। इस मार्ग के डीपीआर तैयार करने के लिए कार्यदायी संस्था का चयन पहले ही हो चुका था। इस मार्ग को बनाने के लिए करीब जिस पर लगभग 1500 करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान है। अब डीपीआर में संशोधन किया जा रहा है। इसके लिए फिर से सर्वे का कार्य किया जाएगा। फेफना से मऊ तक इस मार्ग पर पांच जगहों पर रेलवे क्रॉसिंग पड़ते हैं। पहले के सर्वे में सभी क्रॉसिंग पर ओवरब्रिज बनाने की योजना है लेकिन इसको लेकर एनएचएआई ने अब बदलाव किया है।
अब इसे तीन करने की तैयारी है। जिले के सड़कों की बेहतर कनेक्टिविटी की योजना अब धरातल पर उतरती दिखाई देने लगी है। फेफना-मऊ मार्ग पर बढ़ते ट्रैफिक को देखते हुए पिछले साल शासन ने राष्ट्रीय राजमार्ग की स्वीकृति दी थी। मार्ग को फोरलेन बनाने की कवायद एनएचएआई की तरफ किया गया है। फोरलेन के डीपीआर की मंजूरी पहले ही मिल चुकी थी। डीपीआर तैयार भी हो चुका था लेकिन एनएचएआई की तरफ से अब बदलाव किया जा रहा है।
तीन जगहों पर ही रेलवे पुल का निर्माण होगा
फेफना-मऊ फोरलेन पर पांच क्रॉसिंगों पर ओवर ब्रिज बनाने के निर्णय में बदलाव होगा। अब इस मार्ग पर तीन जगहों पर ही रेलवे पुल का निर्माण किया जाएगा। दो अन्य जगहों पर बाईपास के लिए अब सर्वे होगा। पहले यह मार्ग स्टेट हाईवे-34 था। केंद्र सरकार ने फेफना-मऊ मार्ग को एनएच कोड 128 बी आवंटित किया है। फोरलेन बनने के बाद यह मार्ग आजमगढ़ फोरलेन में सीधे जुड़ जाएगा।
इन स्थलों पर पड़ती रेलवे क्रॉसिंग
राष्ट्रीय राजमार्ग बलिया-मऊ अब पांच रेलवे क्रॉसिंग पड़ती हैं। इनमें फेफना, गढि़या, पकवाईनार और मऊ के रतनपुरा व हलधरपुर शामिल हैं। फेफना व मऊ के बीच एक स्थान पर टोल प्लाजा भी बनाने की योजना है। टोल प्लाजा के लिए सर्वे का कार्य पूरा हो गया है।
फेफना-मऊ फोरलेन निर्माण के लिए सर्वे फिर से किया जाएगा। इसके लिए एनएचएआई की तरफ से कार्यदायी संस्था को निर्देश दिए गए हैं। आरओबी कम करने की योजना है। उसके स्थान पर बाईपास बनाया जाएगा। सर्वे के बाद बाईपास स्थल का निर्धारण होगा। - इंजीनियर अजय सिंह, परियोजना निदेशक एनएचएआई गाजीपुर।