सूर्योपासना का पर्व डाला छठ पर नगर समेत ग्रामीणांचलों के नदी तटों और सरोवर के किनारे विहंगम दृश्य देखने को मिला। जगह-जगह मेले जैसा माहौल था। पर्व को लेकर लोगों में गजब का उत्साह भी दिखा।
नगर के टाउन हाल बापू भवन, महावीर घाट, रामलीला मैदान, बिचला घाट, विजयीपुर घाट, लालघाट, राजपूत नेउरी, बेदुआ, गौशाला रोड, मिश्र नेउरी, आनंद नगर, संकट मोचन कालोनी, हरपुर नगर, जटहा बाबा मंदिर, हाइड्रिल कालोनी, भृगु आश्रम, बहादुरपुर, गोठहुली, काशीपुर, मिड्ढा, अगरसंडा निधरिया, पौहाड़ीपुर सहित अन्य घाटों और सरोवरों पर व्रती महिलाएं अपराह्न तीन बजे से पहुंचना शुरू कर दीं।
व्रती महिलाओं ने विधिविधान से पूजन-अर्चन कर अस्ताचल गामी सूर्य को अर्घ्य दिया। इस दौरान पारंपरिक और लोकप्रिय गीत गाती हुई महिलाओं की टोली नदी, सरोवर और पोखरा आदि पर पहुंची। जहां पर बनी वेदी पर विधिवत पूजन-अर्चन किया।
ग्रामीण इलाके में भी प्रमुख रूप से गंगा घाट कोटवा नरायणपुर, उजियारघाट, नसीरपुर मठ, भरौली, गोविंदपुर, सोहांव, लक्ष्मणपुर, फेफना, सागरपाली, ओझवलिया, जवहीं दियर, हासनगर, मझौंवा घाट, पचरूखिया घाट, नौरंगा घाट, लालगंज घाट आदि पर लाखों व्रती महिलाओं ने डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया।
जबकि नगर के शिवरामपुर गंगा घाट और कीनाराम घाट पर भी भीड़ उमड़ पड़ी थी। इन घाटों पर पैर तक रखने की जगह नहीं थी। जैसे ही भगवान भास्कर अस्त होने लगे, व्रती महिलाओं ने उन्हें अर्घ्य देकर परिवार के सुख-समृद्धि की कामना की।
इनके अलावा घर के सदस्यों ने भी भगवान सूर्य को अर्घ्य दिया। व्रती महिलाओं की सुरक्षा और सुविधा के मद्देनजर विभिन्न समिति के लोगों के साथ ही पुलिसकर्मी तैनात रहे।