अपराजिता कार्यक्रम के दौरान उपस्थित महिलाएं।
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बलिया। जबतक समाज में लोगों की सोच नहीं बदलेगी तब तक महिलाओं के सामने पैदा होने वाली चुनौतियां खत्म नहीं होंगी। सोच से ही किसी व्यक्ति, समाज और राष्ट्र का उत्थान या पतन निश्चित होता है। यह शिक्षा और संस्कार के बगैैर के संभव नहीं है। इसके लिए शिक्षित महिलाओं को आगे आना होगा। परिवार के लोगों को सहयोग करना होगा। ये बातें अमर उजाला की ओर से अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स के तहत रामपुर स्थित डॉ. रामविचार रामरती सरस्वती विद्या मंदिर में शुक्रवार को ‘वर्तमान परिवेश में महिलाओं की कैसे हो सुरक्षा’ विषयक संवाद में जागरूक महिलाओं ने कहीं। इस दौरान महिलाओं ने एक स्वर से हैदराबाद दुष्कर्म कांड के चारों आरोपियों के एनकाउंटर को उचित बताया। इस दौरान डॉ. रामविचार रामरती सरस्वती बालिका विद्या मंदिर कढी की प्रधानाचार्य उमा सिंह ने कहा कि बच्चों के अंदर बचपन से ही शिक्षा के साथ ही संस्कार देना होगा। लड़का लड़की में फर्क मिटाना होगा। कानून में बदलाव कर दुष्कर्मियों को तत्काल सजा देनी चाहिए। इसी विद्यालय की कोषाध्यक्ष भारती सिंह ने कहा कि महिलाएं चुनौतियां झेलते हुए निष्ठा से परिवार व समाज का सेवा करती हैं। लोगों की सोच बदल रही है और महिलाएं आत्मनिर्भर बन रही हैं। महिलाओं को जागरूक होना होगा।
शिक्षिका उषा सिंह ने कहा कि महिलाओं के साथ घटनाओं की त्वरित सुनवाई कर शीघ्र आरोपियों को सार्वजनिक तौर पर कड़ी सजा देने की व्यवस्था होनी चाहिए। शिक्षिका संगीता श्रीवास्तव ने कहा कि बच्चों को संस्कारित करने के साथ ही उन्हें सही व गलत का एहसास कराना चाहिए। उपमा सिंह ने कहा कि निर्भया कांड में अपराधियों को फांसी की सजा भी सुना दी गई है। बावजूद उन्हें सजा क्यों नहीं दी जा रही है। यह लोगों के समझ से परे है। शिक्षिका अंजू वर्मा ने कहा कि सुरक्षा के लिए शहर और ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को आत्म रक्षा का प्रशिक्षण देने की व्यवस्था सरकार को करनी चाहिए।
शिवांगी गुप्ता ने कहा कि लड़का व लड़की के फर्क व सोच को बदलने की जरूरत है तभी महिला अपराध पर अंकुश लग सकेगा। शिक्षिका कंचन तिवारी ने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा शिक्षा रूपी हथियार व संस्कार से किया जा सकता है। इसके लिए महिलाओं को जागृत होना पड़ेगा।
प्रगति राय ने कहा कि लड़का व लड़की की मानसिकता बदलनी होगी। बच्चों को संस्कारित बनाना होगा। प्रियंवदा पांडेय ने कहा कि बिना भेदभाव के समान शिक्षा व समान संस्कार बच्चों को देना चाहिए।
माधुरी सिंह ने कहा कि बच्चों को बचपन से संस्कारित करना होगा ताकि वे न भटकें। प्रीति यादव ने कहा कि महिलाओं को स्वावलंबी बनकर अपनी सुरक्षा खुद करनी होगी। मालती पांडेय ने कहा कि दुष्कर्मियों पर कड़ी सजा देनी चाहिए ताकि दूसरी बार कोई गलती न करे।
बैग में मिर्ची पाउडर रखें महिलाएं : महिला थानाध्यक्ष कल्पना मिश्रा ने कहा कि महिलाएं परिजनों को बताकर घर से निकलें और बैग में मिर्ची पाउडर व स्प्रे रखें। कराटे सीखें और आत्मिनिर्भर बनें। अपने बच्चों के अंदर संस्कार डालें। लड़का व लड़की में भेदभाव ना करें। उन्हें गलत सही का एहसास कराएं। महिलाओं की सहायता के लिए कई हेल्पलाइन नंबर हैं जिस पर सूचना दी जा सकती है। सूचना के बाद पुलिस मौके पर पहुंचेगी।