मनियर के ककरघट्टा गांव में जमीन काट रही घाघरा।
क्षेत्र के ककरघट्टा गांव में एक हफ्ते बाद शनिवार की शाम पांच बजे तेज रफ्तार कटान रिहायशी इलाके में पहुंच गया। जिससे पीड़ित परिवार अपना-अपना घर खाली करने लगे। पानी किनारे पहुंचते ही गांव में अफरा-तफरी मच गई। कटान का यूं ही मिजाज बना रहा तो ककरघट्टा गांव का अस्तित्व खत्म होने में देर नहीं लगेगी। सूचना पर अधिकारी जरूर पहुंचे, लेकिन सिवाय मूकदर्शक बने रहने के अलावा कोई उपाय नहीं सूझा ।
रविवार को ककरघट्टा गांव का नजारा कुछ यूं था कि लोग अपने-अपने घरों का सामान सुरक्षित निकालने जुटे रहे। नरम पड़ी घाघरा एक बार फिर से अपना रौद्र रूप धारण करते हुए ककरघट्टा गांव पर कहर ढाहना शुरू कर दिया। एक बार इतनी तेज कटान देख गांव की आबादी की धुकधुकी बढ़ गई है।
इस दौरान ग्रामीण अपनी खाट, बिस्तर सिर पर ढ़ोते नजर आए। कोई आंखों में आंसू लिएआशियाना उजाड़ने में लगा था तो कोई गृहस्थी का सामान समेटने में लगा हुआ था।कटान में शिवनाथ गोंड के रिहायशी मकान का कुछ हिस्सा चले जाने के कारण ग्रामीण लालचंद राम, अवतार आजाद, रघुनाथ, श्री भगवान, मंगल देव आदि लोगों की धुकधुकी बढ़ गई है।
कटान की सूचना पर अधिकारियों के हाथपांव फूलने लगे। इस मौके पर तहसीलदार बांसडीह लालबाबू दूबे, थानाध्यक्ष मनियर शेर सिंह तोमर, लेखपाल संजय कुमार, राजेश कुमार सहित तमाम प्रशासनिक अमला मौके पर पहुंच बचाव कार्य में जुट गया।