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हत्या में प्रयुक्त बरामद सामान जांच के लिए लैब भेजा

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बलिया। हल्दी थाना क्षेत्र के सोनवानी गांव में सोमवार की रात्रि हुए तिहरे हत्याकांड में पुलिस ने आरोपियों से हत्या में प्रयुक्त बरामद चाकू, कपड़ा, मोबाइल जांच के लिए वाराणसी स्थित प्रयोगशाला में भेज दिया है। पुलिस ने सभी चारों आरोपियों को पहले ही गिरफ्तार कर बुधवार को जेल भेज दिया था। उक्त सामान आरोपियों की निशानदेही पर बरामद किए गए थे।
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गांव सोनवानी में आरोपियों ने पहले संदीप सिंह को बुलाकर गांव से बाहर स्थित बागीचे में चाकू से हत्या कर दी थी और कुएं में शव को फेेंक दिया था। इसके बाद, आनंद विक्रम सिंह को बुलाकर बड़ी बगिया में ले गए, जहां चाकू से मारकर हत्या कर दी। आनंद विक्रम सिंह के शव को भी कुएं में ले जाकर फेंक दिया था। साक्ष्य छिपाने के उद्देश्य से संदीप के पिता उमाशंकर सिंह की हत्या उसके घर जाकर की। किचन में शव रख बाहर से बंद कर दिया। घटना के बाद आलमारी में रखा ढ़ाई लाख रुपया लेकर फरार हो गए थे। पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल तो भेज दिया है, हत्या का कारण रुपए का विवाद बताया जा रहा है, लेकिन विवाद कितने रुपए का था ये स्पष्ट नहीं हो पा रहा है। पुलिस की पूछताछ में मुख्य आरोपी संदीप से भोलू ने 20 हजार रुपये लेने तथा दूसरे आरोपी सोनू सिंह ने एक लाख रुपया लेने की बात स्वीकार की थी। इसे वापस लेने के लिए संदीप दोनों पर दबाव बना रहा था, लेकिन इतनी छोटी धनराशि के तीन हत्याएं कई सवालों को जन्म दे रही है। इस बाबत पुलिस अधीक्षक ने राज करन नय्यर ने बताया कि विवेचना के दौरान धनराशि और विवाद की पूरी बात स्पष्ट हो जाएगा। जांच जारी है।
इकलौते वारिस दिलीप की तलाश में गोरखपुर गई पुलिस
हल्दी। थाना क्षेत्र के सोनवानी गांव में घर के सभी सदस्यों की एक साथ हत्या के बाद घर की देखभाल करने वाला कोई नहीं है। ऐसे में पुलिस टीम इकलौते वारिस दिलीप की तलाश में गोरखपुर गई है। उमाशंकर सिंह के तीन लड़कों में दिलीप सिंह गोरखपुर में रहता है। साधु सा वेश बना लिया है। दो अन्य लड़के संदीप व विक्रम पिता उमाशंकर के साथ गांव पर रहते थे। तीनों की हत्या एक ही दिन किए जाने के कारण घर में रहने वाला कोई नहीं है। पुलिस घर के दरवाजे पर ताला लगाकर खुद पहरा दे रही है। अब पुलिस को इकलौते वारिस दिलीप सिंह की तलाश है। थाने के उप निरीक्षक शिवमूर्ति तिवारी अपने हमराहियों के साथ सोनवानी गांव निवासी अनिल सिंह को लेकर गोरखपुर गए हैं। ताकि उसकी पहचान हो सके और दिलीप सिंह के आने के बाद कुछ हद तक पुलिस की जिमेदारी कम हो जाएगी।
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थोड़े ही समय में संदीप ने बनाई थी संपत्ति
हल्दी। गरीब परिवार से ताल्लुक रखने वाले उमाशंकर सिंह के तीन पुत्रों में मझले संदीप सिंह का जन्म 1987 में हुआ। पिता उमाशंकर ने खेती किसानी करके बच्चों को जैसे-तैसे पाल-पोस कर बड़ा किया था। संदीप कई नाजायज धंधा में शामिल रहने के कारण थोड़े ही समय में काफी संपत्ति अर्जित कर ली थी। ग्रामीण बताते हैं कि दर्जनों लोगों के साथ धोखाधड़ी करके बड़े ही शानो शौकत के साथ जीवन यापन करता था। गांव के बाहर वह जिस तरह से घर बना रहा था। वह मध्यमवर्गीय परिवार के बूते की बात नहीं है। मकान में एसी से लेकर अन्य उपकरण अव्वल दर्जे का प्रयोग कर रहा था।
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