भाजपा से ही विद्रोह कर निर्दलीय चुनाव लड़ीं केतकी सिंह रामगोविंद चौधरी से बहुत कम मतों से हारकर दूसरे स्थान पर रही थीं। वर्ष 2012 के चुनाव में भाजपा से केतकी सिंह, वर्ष 1996 के चुनाव में भाजपा से पीएन तिवारी इस सीट से दूसरे स्थान पर रहे थे। इसके अलावा किसी चुनाव भाजपा इतनी दमदार उपस्थिति नहीं दर्ज करा पाई।
बात इससे पहले की चुनावों की करें तो नेता प्रतिपक्ष रामगोविंद चौधरी इस सीट से तीन बार विधायक रह चुके हैं। एक चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। इस बार पांचवीं बार मैदान में हैं। उनसे पहले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रहे स्व. बच्चा इस सीट से सबसे ज्यादा बार विधानसभा में प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। वो 1996, 1993, 1991, 1980, 1977, 1974, 1969 में विधायक रह चुके हैं। इसके अलावा विजयलक्ष्मी भी दो बार सीट का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं।
विधानसभा चुनाव-2022 में परिस्थितियां कुछ अलग हैं। इस सीट से सपा से फिर रामगोविंद चौधरी उम्मीदवार हैं। पार्टी का सुभासपा के साथ गठबंधन भी है। उसे अपने मतों के अलावा राजभर मतों की भी आस हैं। वहीं, बसपा ने सुभासपा में संगठन का पद छोड़कर आईं मानती राजभर को प्रत्याशी घोषित कर दिया है।
इससे राजभर मतों में बिखराव से इंकार नहीं किया जा सकता। भाजपा से केतकी सिंह के अलावा कनक पांडेय, शिवशंकर चौहान आदि दावेदारी कर रहे हैं। निषाद पार्टी से गठबंधन की भी बातें चल रही हैं। अभी टिकट फाइनल नहीं हैं।