स्वामी सहजानंद स्मृति एवं चेतना फाउंडेशन के तत्वावधान में रविवार को सिकंदरपुर के बस स्टैंड के पास स्थित एक निजी नर्सिंगहोम के मैदान में स्वामी सहजानंद सरस्वती की जयंती मनाई गई। वक्ताओं ने कहा कि आजादी के दौरान स्वामी सहजानंद ने किसान आंदोलन का नेतृत्व किया था।
कहा कि किसानों की तरक्की से ही देश्ा का विकास होगा। उन्हें भूमिहार वंश के एकता का प्रतीक बताते हुए उनके कृतित्व और व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम के प्रारंभ में मंगल पांडेय इंटर कालेज नगवा के प्रधानाचार्य रवि राय ने सभी अतिथियों का फूल-मालाओं और इत्र के साथ ही अंगवस्त्रम से स्वागत किया। साथ ही बैज से अतिथियों को अलंकृत भी किया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि ने प्रो. जयप्रकाश राय धूकेतू ने कहा कि निजी कंपनियों के उत्पादन की एमआरपी होती है। जबकि किसानों के उत्पादन की कोई एमआरपी नहीं होती। इससे किसान हमेशा ठगा जाता जाता है। उन्होंने कहा कि देश भर में गत 20 सालों में तीन लाख 68 हजार किसान आत्महत्या कर चुके हैं।
यह स्वामी सहजानंद सरस्वती द्वारा चलाए गए किसान आंदोलन के साथ नाइंसाफी है। सहजानंद का सम्मान तभी होगा, जब किसान खुशहाल होंगे। डा. अखिलेश कुमार राय ने कहा कि सभी राजनीतिक दल किसानों की समस्याओं पर खड़ियाली आंसू बहाते हैं और उनकी समस्याओं के लिए आजादी के बाद से अब किसी ने गंभीर प्रयास नहीं किया।
इसी का परिणाम है कि आज किसानों की दुर्दशा हो रही है और युवा पीढ़ी खेती करने से कतरा रही है। डा. जनार्दन राय ने कहा कि किसान किसी भी समाज का रीढ़ होता है। जिस समाज और देश में किसान की उपेक्षा होती हो, उस देश के विकास की बात करना बेमानी होगी। स्वागत भाषण में रवि राय ने कहा कि स्वामी सहजानंद सरस्वती हिंदुस्तान के किसान आंदोलनों के सबसे बड़े नेता थे। कार्यक्रम को संबोधित करने वालों में पूर्व मंत्री राजधारी, अरविंद राय, डा. मदन राय, विभव शंकर ठाकुर, सुदामा राय, अवध बिहारी चौबे, बब्लू राय आदि लोग मौजूद रहे।
अध्यक्षता बाबूराम राय तथा संचालन मंजर राय ने किया।