इन दिनों दालों के भाव आसमान छूने लगे हैं। पहले गरीबों और अब मध्यम वर्गीय परिवार की थाली से भी दाल दूर होने लगी है। इससे लोगों के स्वास्थ्य पर भी असर पड़ रहा है। सबसे अधिक अरहर की दाल के दाम तेज हो रहे हैं। तीन माह पहले तक 65 से 70 रुपये किलो बिक रहे अरहर की दाल अब 120 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है। अन्य दालों की कीमतों में भी डेढ़ गुना इजाफा हुआ है।
अरहर, उड़द, मूंग और चने की दाल बहुत तेजी से चढ़ रहे हैं। 60 दिन पहले इन दालों का दाम 50 से 65 के बीच था। अब अचानक दाम में आए उछाल से सबके होश उड़ गए हैं। आलम यह है कि किचेन में गृहिणियां दाल को केवल अतिथियों के लिए बचाकर सुरक्षित रख रही हैं। खुद दाल की जगह हरी सब्जी से काम चलाया जा रहा है। शिक्षिका विजया लक्ष्मी पांडेय ने बताया कि एनडीए सरकार के सत्तासीन होते ही मसालों के दाम इतने बढ़ गए हैं कि आम आदमी खा तक नहीं सकता। हर चीज महंगी हो गई है।
इलाके की गृहणी उमावती सिंह का कहना है कि अभी दो माह पहले दाल 55 से 70 रुपया प्रति किलो मिल रहा था, लेकिन अब आलम यह है कि दाल की कीमत डेढ़ से दो गुनी हो गई है। ऐसे में गरीब तबके के लोगों परेशानी में हैं। होटलों में भी दाल की कीमत बढ़ने से दाल का रेट प्रति प्लेट डेढ़ गुना बढ़ गया है। डा. सुमन सिंह का कहना है स्वास्थ्य की दृष्टि से दाल सभी के लिए जरूरी है लेकिन दाल महंगी होने के कारण आम लोगों की थाली तक नहीं पहुंच पा रही है। ऐेस में लोग कुपोषण के शिकार हो सकते हैं।
गृहणी अर्चना सिंह का कहना है कि महंगाई की वजह से कांग्रेस की सरकार केंद्र से बेदखल हुई। लोगों को भरोसा था कि महंगाई पर अंकुश लगेगा लेकिन एनडीए की सरकार का भी बाजार पर नियंत्रण नहीं रहा। वर्तमान में अरहर दाल 65 से बढ़कर 120, चना दाल 50 से 75, मसूर दाल 65 से बढ़कर प्रति किग्रा 80 रुपया हो गया है।