बलिया। बलिया बलिदान दिवस (19 अगस्त, 1942) की 79वीं वर्षगांठ पर बृहस्पतिवार को जिला जेल के बाहर जंगे आजादी के दीवानों का हुजूम निकला। हिंदुस्तान जिंदाबाद और भारत माता की जयकार से वातावरण गूंज उठा। इतिहास तारीख बनकर एक बार फिर सामने खड़ा था। हर साल की तरह जिला जेल के दरवाजे को प्रतीकात्मक तौर पर खोल दिया गया। सेनानियों के साथ देशभक्ति के रंग में डूबे लोगों ने यहां जुलूस की शक्ल में निकलकर शहर के सभी सेनानियों के प्रतिमाओं पर श्रद्धासुमन अर्पित किए। इसके बाद टाउन हाल में आजादी के दीवानों की वीर गाथा को याद किया।
19 अगस्त 1942 को तब जेल का फाटक खोला गया था और स्वतंत्रता आंदोलन के दीवाने आजाद हुए थे। उस समय जिले ने न सिर्फ बागी बलिया का तमगा हासिल किया बल्कि देश में सबसे पहले आजाद होने का गौरव भी हासिल कर लिया था। इस ऐतिहासिक घटना को प्रतीकात्मक रूप में जब बृहस्पतिवार को दोहराया गया तो जिला कारागार के आसपास का पूरा माहौल देशभक्ति के रंग में सराबोर हो गया। उन पलों को याद करके जिले के लोगों की भुजाएं फड़कने लगीं। जिला कारागार पर स्वतंत्रता सेनानी काम विचार पांडेय के साथ डीएम अदिति सिंह, एसपी राजकरन नैय्यर ओंकार सिंह सुबह ही जेल के मुख्य द्वार के बाहर इकट्ठा हो गए थे। जैसे ही नौ बजे, जेल का मुख्य फाटक खोल दिया गया। अमर शहीदों के नाम पर गगनभेदी नारे लगाए जाने लगे। सेनानी राम विचार पांडेय को माला पहनाकर उनका अभिनंदन किया। जिला कारागार परिसर में ही स्थापित सेनानी राजकुमार बाघ की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया गया।
इसके बाद समाजसेवी, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित, विभिन्न राजनीतिक दलोें के नेता एवं संगठनों के पदाधिकारी जुलूस की शक्ल में सेनानियों की प्रतिमाओं तक पहुंचे। बाबू कुंवर सिंह, रामदहिन ओझा, मुरली बाबू, चित्तू पांडेय, तारकेश्वर पांडेय, मंगल पांडेय, चंद्रशेखर आजाद, उमाशंकर सोनार, महात्मा गांधी चौक स्थित प्रतिमाओं पर पुष्प अर्पित किया गया। शहीदों का जयघोष भी किया गया। जुलूस बापू भवन (क्रांति मैदान) टाउन हाल में पहुंचकर सभा में तब्दील हो गया। संचालन डॉ. शत्रुघ्न पांडेय ने किया। आयोजन समिति के संस्थापक सदस्य लक्ष्मण गुप्ता ने कहा कि बलिया बलिदान दिवस जनपद के गौरव एवं सम्मान की स्मृतियां हैं। द्विजेंद्र मिश्रा, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी रामविचार पांडेय, मुन्ना उपाध्यायने विचार रखे। संजय उपाध्याय, राजधारी सिंह, अनूप गुप्ता, महावीर चौधरी, सनत तिवारी, दिनेश चंद्र, उषा सिंह, रामनाथ सिंह, चिराग उपाध्याय, लक्ष्मण यादव, विवेकानंद सिंह, शहीद अली खां, डॉ. संतोष कुमार गुप्ता, चूड़ामणि, सागर सिंह, सत्यप्रकाश, जानेंद्र पांडेय, रामकृष्ण यादव, पवन पांडेय थे। चित्तू पांडेय के प्रपौत्र विनय पांडेय ने धन्यवाद दिया।