बलिया। उत्तर प्रदेश साहित्य परिषद व साहित्य चेतना समाज के तत्वाधान में नववर्ष की पूर्व संध्या पर आवास विकास में कवियों व साहित्यकारों ने अपनी रचनाओं से नववर्ष स्वागत किया।
उमा सिंह के सरस्वती वंदना वीणा वादिनी हे मां शारदे से कार्यक्रम की शुरुआत की गई। डॉ. शशि प्रेमदेव ने - उम्र भर जो उलझनें अपनी ही सुलझाएंगे हम, या इलाही दूसरों के काम कब आएंगे हम... सुनाया। शंकर शरण काफिर ने - देखो तो दरवाजे पर दस्तक कौन देता है, मोहब्बत हो तो कह देना यहां वो अब रहते नहीं... सुनाया।
संचालक डॉ. नवचंद्र तिवारी ने - नववर्ष का नव विहान है, नव प्रकाश ले आया है। प्राची से उन्नयन शिखर तक सूर्य समग्र मुस्काया है...सुना कर तालियां बटोरीं। डॉ. कादंबिनी सिंह ने - इधर इश्क इबादत है झूठा नहीं है, उधर वो फरिश्तों के जैसा नहीं है...से मंत्र मुग्ध कर दिया। प्रेमचंद गुप्ता ने - नव वर्ष अभिनंदन सभी को प्रेम पड़े सभी के दिल में... सुनाया। डॉ. फतेहचंद बेचैन ने - नए साल में हे मालिक ऐसा हमें हिम्मत दो। दुष्कर्मियों का कर दे सफाया ऐसा हमको ताकत दो... से वाहवाही लूटी। प्रीति गुप्ता ने भी ने रचना सुनाई।
इस मौके पर प्रतिष्ठा, प्रदीप्ति, प्रवर, संतोष गुप्ता, विनय, प्रांजल आदि थे। अध्यक्षता डॉ. शशी प्रेमदेव व आभार प्रेमचंद गुप्ता ने व्यक्त किया।