बलिया। जश्न-ए-ईद मिलादुन्नबी पर नगर में निकाले गए जुलूस-ए-मुहम्मदी में जनसैलाब उमड़ पड़ा। जुलूस में नारे तकबीर, नारे रिसालत सरकार की आमद मरहबा से इलाके गूंज उठे।
जुलूस में झंडे लिए युवाओं एवं बच्चों की टोली पूरे जोशोखरोश के साथ शामिल रही। नगर प्रमुख हिस्से में जुलूस और नारे से पूरा इलाका गुंजायमान रहा।
नगर के विसुनीपुर स्थित जामा मस्जिद बहेरी, उमरगंज सहित अन्य मस्जिदों से जुलूस निकाले गए। नगर के जामा मस्जिद, बड़ी मस्जिद बहेरी से निकाला गया जुलूस विभिन्न मार्गों से होते हुए गंतव्य स्थान तक पहुंचा। जुलूस के सबसे आगे इस्लामिक झंडे के साथ नगर के विभिन्न मदरसों के बच्चे बैनर लेकर चल रहे थे।
जुलूस में नारा-ए-तकबीर, अल्लाहो अकबर, नारा-ए-रिसालत या रसूल अल्लाह और इस्लाम जिंदाबाद की सदाएं बुलंद की गईं। जबकि अंजुमनें नातिया कलाम पढ़ते हुए चल रही थीं। वहीं, नगर से सटे अमडरिया नई बस्ती से मदरसा अरबिया मैदनीतूर रसूले के तत्वावधान में जुलूस निकाला गया।
भरौली संवाददाता के अनुसार, कोटवा नारायनपुर, भरौली, अमांव सहित अन्य क्षेत्रों में हजरत पैगंबर मुहम्मद साहब के जन्मदिन के मौके पर जलसोें की धूम रही। सिकंदरपुर ग्रामसभा में भी परंपरागत ढंग से जुलूस-ए-मुहम्मदी निकाला गया।
बेल्थरा रोड संवाददाता के अनुसार, नगर में परंपरागत ढंग से जुलूस-ए-मोहम्मदी निकाला गया। नूरी जामा मस्जिद से प्रारंभ होकर जुलूस रामलीला मैदान रेलवे चौराहा, कुंडैल ढाला, सोनाडीह मोड़, चौधरी चरण सिंह त्रिमुहानी और मुख्य सड़क होते हुए गंतव्य पर पहुंचकर समाप्त हुआ। रामलीला मैदान में जलसा हुआ। इस मौके पर लंगर-ए-रसूल का आयोजन किया गया।
नगरा संवाददाता के अनुसार, जुलूस में ऊंट घोड़ा के साथ मुस्लिम बंधुओं ने नगरा बाजार का भ्रमण किया। मदरसों के बच्चे ‘आतंकवाद का कोई मजहब नहीं होता’, ‘इंसानियत सबसे बड़ा धर्म है’, ‘राम और रब एक है’ लिखी तख्तियां लेकर चल रहे थे।