बुधवार की सुबह नौ बजे जैसे ही जिला जेल का फाटक खुला, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, समाजसेवी संस्थाओं तथा विभिन्न राजनीतिक दलों के लोगों ने प्रतीकात्मक रूप से जेल से बाहर कदम रखा और भारत माता का जयघोष किया। वर्ष भले ही 2015 रहा हो लेकिन लोगों का जोश और उत्साह 1942 सा ही था। इस अवसर पर अगस्त क्रांति के शहीदों को श्रद्धासुमन अर्पित किया गया।
बलिदान दिवस पर बागी बलिया की धरती देशभक्ति से ओत प्रोत रही और चप्पे-चप्पे पर क्रांति और कुर्बानी से जुड़े नायकों को याद किया गया। बुधवार को बलिया बलिदान दिवस पर जिला कारागार का फाटक खोला गया। जिलाधिकारी मुरली मनोहर लाल, पुलिस कप्तान राजू बाबू सिंह, अपर पुलिस कप्तान केसी गोस्वामी, सांसद भरत सिंह सहित अन्य अधिकारियों के साथ ही विभिन्न संगठनों के लोग, स्कूली बच्चे इस गर्व के पल के गवाह बने।
प्रतीकात्मक रूप से जेल से निकले स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, समाजसेवी संस्थाओं तथा विभिन्न राजनीतिक दलों के लोगों ने रामविचार पांडेय सेनानी उत्तराधिकारी संगठन की अध्यक्ष राधिका मिश्र के नेतृत्व में शहीद राजकुमार बाघ की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया।
इसके बाद नगर के लिए जुलूस रवाना हुआ। जूलुस में शामिल एसडीएम सदर बच्चालाल मौर्या, भाजपा नेता नागेंद्र पांडेय, जितेंद्र तिवारी, कांग्रेस नेता शशिकांत त्रिपाठी, राजकुमार पांडेय आदि वरिष्ठजनों के नेतृत्व में लोग जेल परिसर से सीधे कुंवर सिंह चौराहा पहुंचे, वहां वीर कुंवर सिंह की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया।
इसके बाद कारवां शहीदों को श्रद्धांजलि देते हुए धीरे-धीरे नगर की ओर आगे बढ़ा, जहां शहीद रामदहिन ओझा, मुरली मनोहर जी की प्रतिमा पर श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए चित्तू पांडेय, एवं ओक्डेनगंज चौराहे पर उमाशंकर सोनार को माल्यार्पण करते हुए जुलूस सीधे शहीद पार्क पहुंचा।
जहां सभी ने गांधी जी तथा सेनानी श्याम सुंदर ओझा के प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। वहां से कारवां सेनानियों के नेतृत्व में टाउन हाल स्थित सभा कक्ष में पहुंचा जहां स्वतंत्रता संग्राम सेनानी रामविचार पांडेय की अध्यक्षता में श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई।