बलिया। नन्हें-मुन्ने बच्चों को स्कूल भेजने के लिए अभिभावक भले ही संवेदनशील हों, मगर विद्यालय इसे लेकर संवेदनहीनता का परिचय दे रहे हैं। अपने जिले में 300 ऐसे वाहन हैं, जो मानक का पालन नहीं कर रहे हैं। लिहाजा असुरक्षित हाल में फिटनेस, पंजीकरण के बगैर जिले के विभिन्न विद्यालयों तक बच्चे पहुंच रहे हैं। फिटनेस पंजीकरण के बगैर चलने वाले 300 स्कूली वाहनों के खिलाफ एआरटीओ प्रवर्तन नोटिस भेज चुके हैं और सख्ती से सड़क पर चलने से रोकने के भी निर्देश विभाग की ओर से दिया जा चुका है। अगर 15 दिनों में इन वाहनों का फिटनेस नहीं हुआ तो पंजीकरण निरस्तीकरण की कार्रवाई आरंभ की जाएगी।
जिले में करीब 1432 निजी विद्यालयों का संचालन हो रहा है। इन विद्यालयों में बच्चों को घर से स्कूल तक पहुंचाने के लिए स्कूली बस, मैजिक और अन्य वाहन संचालित होते हैं। परिवहन विभाग में जिले भर के स्कूलों के करीब 746 वाहन पंजीकृत हैं। इनमें 300 से अधिक स्कूली वाहनों का फिटनेस फेल हो चुका है। यह स्थिति तब है, जब शासन ने ऐसे वाहन जो बच्चों को स्कूल तक पहुंचाते हैं, को पूरी तरह सुरक्षित कर देने के निर्देश दे रखा है। इसके लिए एआरटीओ को जांच की जिम्मेदारी दी गई है। इन स्कूली वाहनों को परिवहन विभाग की ओर से बीते माह नोटिस दिया गया था लेकिन किसी स्कूली वाहन के स्वामी ने फिटनेस कराने की जहमत नहीं उठाई। अब विभाग रिमाइंडर भेज रहा है।
आठ स्कूली बसें सीज, 15 दिन में फिटनेस कराने का निर्देश
परिवहन विभाग के आरआई राजभूषण चौधरी ने कहा कि तीन सौ स्कूली वाहनों का फिटनेस पंजीकरण नहीं हुआ है, जिन्हें नोटिस भेजा गया है। इन्हें समय देकर पंद्रह दिन में फिटनेश कराने का निर्देश दिया गया है। यदि समय सीमा के भीतर फिटनेश नहीं हुआ तो इनका पंजीकरण रद्द कर दिया जाएगा। बच्चों की सुरक्षा प्राथमिकता पर है। अब तक जांच में आठ स्कूली बसों को सीज किया जा चुका है, जबकि आधा दर्जन पर जुर्माना लगाया गया है। मानक का पालन न करने वाले वाहनों को सख्ती से सड़क पर चलने से रोका जाएगा।