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शहर में काल बनकर खड़े हैं जर्जर भवन, एक भी नहीं गिराया

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बरसात का मौसम शुरू होने के साथ शहर के अलग-अलग इलाकों में जर्जर हो चुके भवनों में रहने वाले लोगों की धड़कन बढ़ने लगी है। कई मकानों की हालत ऐसी है कि वह कभी भी ढह सकते हैं। नगर पालिका ऐसे भवनों को अब तक गिरवा नहीं सकी है। सिर्फ जर्जर भवनों के मालिकों को नोटिस भेजने तक सीमित है। पिछले साल शहर में 28 जर्जर भवन चिह्नित किए गए थे, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। शासन के आदेश के बाद भी पालिका प्रशासन इस साल जर्जर भवनों को चिह्नित नहीं कर सका है।
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नगर पालिका का दायरा बढ़ने के बाद शहर की आबादी करीब सवा लाख हो गई है। पिछले साल शहर के 25 वार्डों में बने करीब दस हजार मकानों में 28 जर्जर मकान चिह्नित किए गए थे। चौक, विशुनीपुर, भृगु आश्रम, बेदुआ, जगदीशपुर, हरपुर मिड्ढ़ी, बनकटा, राजपूत नेउरी, लोहा पट्टी आदि मोहल्ले में ये जर्जर मकान हैं। यह मकान प्रमुख बाजारों के साथ ही मुख्य मार्गों के किनारे स्थित है। इन भवनों को गिरवाने की कोई कार्रवाई अभी तक नहीं की गई। पिछले साल नगर पालिका की तरफ से ऐसे भवन मालिकों को नोटिस जारी किया गया था, लेकिन कुछ नहीं हुआ। ऐसे भवनों की घेराबंदी तक नगर पालिका के जिम्मेदार नहीं करा सके।
इस वर्ष नहीं हो सकी चिह्निकरण की कार्रवाई
बलिया। इस वर्ष भी मानसून से पहले जर्जर मकानों को चिह्नित करने के निर्देश जारी किए गए थे। बरसात से पहले ऐसे मकानों को चिह्नित करते हुए खाली कराने के साथ ही जमींदोज कराने के लिए कार्रवाई करनी थी, लेकिन अभी तक कुछ नहीं हो सका है। बरसात शुरू हो गई है। नगर पालिका चिह्निकरण जारी होने की बात कह रही है।
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शहर में मौजूद जर्जर भवनों को चिह्नित करने के लिए कर्मचारियों को लगाया गया है। जर्जर भवनों के मालिकों को नोटिस भेजकर गिराने के लिए कहा जाएगा। ऐसा न करने वालों के खिलाफ कार्रवाई भी होगी। पिछले साल जिन लोगों को नोटिस दिया गया था और उन्होंने जर्जर मकान नहीं गिराए हैं तो उनके खिलाफ कार्रवाई के लिए डीएम को पत्र भेजा जाएगा।
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- दिनेश कुमार विश्वकर्मा, ईओ, नगर पालिका
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