हाईवे की परिधि में आने वाले शराब के ठेके
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ांसद आदर्श गांव ओझवलिया आए दिन सुर्खियाें में रहता है। लेकिन इन दिनों गांव में चर्चा की वजह दारू की दूकान का खुलना बना हुआ है। भाजपा सांसद भरत सिंह के द्वारा साहित्य के मुर्धन्य विद्वान आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी के पैतृक गांव ओझवलिया का चयन किया। तमाम योजनाओं के साथ ही गांव को नशा मुक्त करने का बीड़ा उठाया, लेकिन सासंद के इस अभियान को झटका लग सकता है। इसकी वजह गांव में ही शराब ठेका की दूकान खुल रही है।
भवन निर्माण का कार्य भी तेजी से हो रहा है।योगी सरकार का निर्देश है कि प्रदेश के किसी भी राष्ट्रीय राजमार्ग पर दारू की दूकान नहीं रहेगी और न ही बिकेगी। ऐसे में सभी ठेकेदार एनएच से 500 मीटर दूर जाने की तैयारी में जुट गए हैं। बसरिकापुर चट्टी के पश्चिम स्थित देशी शराब की दूकान भी इसी निर्देश के तहत ओझवलिया जा रही है। जिस स्थान पर दारू की दूकान एक अप्रैल से खुलने जा रही है, वहाँ नादा बाबा का (ब्रम्ह) स्थान है, जहां सैकड़ों महिलायें पूजन-अर्चन करती हैं। क्षेत्र के दोपही अगरौली, रामपुर, बसरिकापुर, नीरुपुर, पिन्डारी, सुजानीपुर, ओझाकछुआ, रेपुरा आदि गांवों के सैकड़ों लोगों के लिए प्रतिदिन गंगा नदी जाने-आने का मात्र एक ही रास्ता है।
अगर शराब की दूकान ओझवलिया खुली तो सबसे ज्यादा समस्या लड़कियों को होगी जिन्हें प्रतिदिन राजकीय इंटर कालेज बसरिकापुर, उदित नारायण ऋषभ बालिका विद्यालय सीताकुन्ड व महाविद्यालय पिन्डारी, मीडिल स्कूल ओझवलिया, जूनियर हाईस्कूल डम्मरछपरा, वाईबीएन पब्लिक स्कूल दोपही सहित विभिन्न स्थानों पर विद्यालय जाना होता है। आबकारी विभाग के कर्मचारी दूकान का मौका मुआयना कर लिए हैं।खास बात यह है कि भाजपा सांसद भरत सिंह द्वारा इस गाँव को गोद लिया गया है। साहित्यकार पं हजारी प्रसाद द्विवेदी के गाँव ओझवलिया के लिए सांसद ने पिछले तीन साल से मेहनत कर नशा मुक्त व ओडीएफ घोषित करने के करीब ला दिया है।