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Ballia News: बच्चे बोले, जब पापा खरीदते ही नहीं तो कैसे पहन कर आएं ड्रेस

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​शिक्षा क्षेत्र नगरा के प्राथमिक विद्यालयों में बिना जूता और स्वेटर के ही स्कूल में पढ़ाई करते
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इंदरपुर। जब पापा ड्रेस, जूते- मोजे व स्वेटर खरीदते ही नहीं तो कैसे पहन कर आएं स्कूल। यह कहना है शिक्षा क्षेत्र नगरा के प्राथमिक विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों का। शासन की ओर से डीबीटी के माध्यम से हर बच्चे को दो ड्रेस, जूते-मोजे, बैग व स्वेटर के लिए उनके अभिभावकों के खाते में 1200 रुपये भेजे जाते हैं।
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लेकिन आलम यह है कि 50 प्रतिशत बच्चे अब भी बगैर ड्रेस, जूते-मोजे व स्वेटर के ही स्कूल पहुंच रहे हैं। कंपोजिट विद्यालय परसिया रूपपुर में 360 बच्चे पढ़ते हैं। अधिकांश बच्चों के पास स्वेटर, जूते-मोजे व ड्रेस नहीं हैं। प्रधानाध्यापिका उषा देवी का कहना है कि अभिभावकों से फोन के माध्यम से इस बाबत कहा जाता है। किंतु वे सुनते ही नहीं हैं। कुछ अभिभावक तो झगड़ा करने पर उतारू हो जाते हैं।
यही हाल कंपोजिट विद्यालय खैरा निस्फी का भी है। कक्षा 4 के छात्र दिव्यांश गिरि ने बताया कि मैं अपने पापा से बार-बार कहता हूं लेकिन वह नहीं खरीदते हैं। यहां भी अधिकांश बच्चे बिना ड्रेस व जूते- मोजे के आए थे। प्रधानाध्यापक कृष्ण कुमार सिंह का कहना है कि अभिभावकों से प्रतिदिन कहा जाता है, लेकिन उन पर इसका कोई असर ही नहीं पड़ता। इस मद में धनराशि हर अभिभावक के खाते में पहुंच गई है। प्राथमिक विद्यालय रेकुआ नसीरपुर में कक्षा दो के छात्र अंकुश व छात्रा अंशिका ने बताया कि पापा से कहने के बाद भी वह जूते-मोजे ड्रेस नहीं खरीद रहे हैं।
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प्रधानाध्यापक संतोष प्रसाद ने कहा कि अभिभावकों के खाते में इस मद में धनराशि भेज दी गई है। प्राथमिक विद्यालय मलपहरसेनपुर के प्रधानाध्यापक बिंदु राम ने बताया कि अभिभावकों से कहने के बाद भी वे सुनते नहीं हैं। नगरा के खंड शिक्षा अधिकारी आरपी सिंह का कहना है कि अभिभावकों को ड्रेस, जूते-मोजे व बैग खरीदने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इसका परिणाम जल्द ही देखने को मिलेगा।
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