गुरुवार को थान प्रभारी राजेन्द्र प्रसाद सिंह वांछित अभियुक्तगणों की गिरफ्तारी हेतु क्षेत्र में गश्त कर रहे थे, उसी दौरान हल्दी-सोनवानी मार्ग के बसुधरपाह जाने वाले रास्ते से तीन व्यक्तियों को पकड़ा। पूछताछ में अपना नाम पीयूष सिंह, अनीष सिंह व अंकुर सिंह निवासी मझौवा बताया। घटना को लेकर कहा कि कवर को बताने के बाद दूसरा कलर लगा दिया गया था।
इसकी शिकायत करने पर अजीत उल्टे पैसों की मांग करने लगा। इसको लेकर हुए विवाद में तीनों ने अजीत की गला दबाकर हत्या कर दी और शव को छुपाने के लिए गंगापुर घाट पर नदी में अजीत का हाथ पैर बाइक में बांधकर फेंक दिया।
घटना के खुलासे को लेकर लोगों के मन में संशय
कुर्सी व सोफा के कवर के विवाद को लेकर अजीत सिंह की हत्या हुई है, इसको लेकर क्षेत्रीय लोगों में संशय बना हुआ है। स्थानीय लोगों की माने तो अजीत व पीयूष के बीच पक्की दोस्ती थी। पीयूष ही अनीश सिंह की बहन की शादी की पूरी व्यवस्था की जिम्मेदारी संभाले हुआ था। आखिर एक कवर के लिए जिगरी दोस्त की हत्या क्यों करनी पड़ी? यह किसी के समझ में नहीं आ रहा है। पुलिस भी इस मामले से पर्दा नहीं उठा रही है।
ग्रामीणों की माने तो लावा मिलाई के समय दोनों भाई मौजूद नहीं थे। स्थानीय लोगों घटना के पीछे कोई गंभीर मामला या किसी चौथे को बचाने का प्रयास कर रहे है। अजीत की पत्नी वाराणसी स्थित घर पर बच्चों को रह कर पढ़ाती है। गांव भी अक्सर आती जाती है। अजीत हमेशा पीयूष के गांव मझौवा आना-जाना और पार्टी मनाने का कार्यक्रम होता था।