गलन भरी ठंड के बीच साइकिल से अपने गंतव्य को जाता राहगीर।संवाद
बलिया। लगभग एक सप्ताह से जारी शीतलहर का दौर मंगलवार को भी जारी रहा। इससे कड़ाके की ठंड से जनजीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया। ठंड के चलते शाम को सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहा। सुबह घने कोहरे व ठंडी हवा के कारण लोग कांप उठे। अलाव ही एक सहारा बना रहा। दिनभर कड़ाके की ठंड व बादलों की मौजूदगी ने मौसम को और सुस्त बना दिया। मंगलवार को अधिकतम तापमान 15.50 व न्यूनतम 10.50 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वहीं, सोमवार को अधिकतम तापमान 19 व न्यूनतम 13 डिग्री दर्ज किया गया था।
दिन की शुरूआत कोहरे से हुई। इसके बाद लगा कि मौसम साफ हो जाएगा लेकिन कोहरा हटने के बाद धुंध छा गया। इसके कारण कंपकपी बनी रही। हालत यह थी कि शहर के चौराहों के साथ ही दुकानों के सामने लोगों ने दिनभर अलाव के पास बैठकर ठंड से राहत पाने की कोशिश करते रहे। सफर कर रहे राहगीरों को भी कड़ाके की ठंड ने मुश्किलें खड़ी कर दीं। बाइक सवारों की रफ्तार भी गलन के कारण धीमी रही।
बेल्थरारोड : गलन भरी ठंड और बर्फीली हवाओं से लोग परेशान हैं। ठंड से बचाव के लिए लोग अलाव तापने के साथ ही घरों में दुबके रहे। नगर पंचायत अध्यक्ष रेनू गुप्ता ने बताया कि ठंड से बचाव के लिए रेलवे चौराहा, अस्पताल, पुलिस चौकी, त्रिमुहानी आदि सार्वजनिक स्थानों पर अलाव जलाने की व्यवस्था की गई है।
बच्चों पर पड़ने लगा ठंड का असर, प्रतिदिन स्वास्थ्य केंद्र पहुंच रहे 60 से 70
बैरिया। लगातार बढ़ रही ठंड से अब बच्चों के स्वास्थ्य पर भारी पड़ने लगा है। तापमान में लगातार गिरावट ठंडी हवाएं व घने कोहरे के चलते छोटे बच्चों में सर्दी जुकाम के साथ-साथ निमोनिया तेजी से फैल रहा है। इसका असर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सोनबरसा व क्षेत्र के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों ओपीडी में लगने वाली भीड़ से लग रहा है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सोनबरसा में औसतन प्रतिदिन 60 से 70 बच्चे बीमार होकर पहुंच रहे हैं। इस तरह से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मुरली छपरा, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जयप्रकाश नगर, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कोटवा में भी बीमार बच्चों की भीड़ सामान्य दिनों की तुलना में अधिक लग रही है। इसमें अधिकांश बच्चे निमोनिया से पीड़ित होकर आ रहे हैं। इसके अलावा सर्दी, जुकाम, खांसी,बुखार, सांस लेने में परेशानी व वायरल संक्रमण के मामले भी लगातार बढ़ रहे हैं। सोनबरसा में तैनात वरिष्ठ चिकित्साधिकारी डॉक्टर आशीष श्रीवास्तव ने बताया कि अब तक कई बच्चों की स्थिति गंभीर होने पर उन्हें सदर अस्पताल रेफर किया जा चुका है। ठंड के मौसम में बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है। खासकर पांच वर्ष उम्र से कम के बच्चों को ठंड से प्रभावित होने की अधिक आशंका होती है। बताया कि बच्चों पर विशेष ध्यान दें। ठंड में घर से बाहर न निकलने दे खान-पान पर विशेष ध्यान दें। गर्म कपड़े और मोजा हमेशा पहनाए रखें। पीने के लिए गुनगुना पानी का उपयोग करें।