विश्व टीबी दिवस पर जिला अस्पताल के जिलाक्षय विभाग में शुक्रवार को गोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसमें टीबी रोग के बारे में वक्ताओं ने विस्तार से प्रकाश डाला।
गोष्ठी को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि सीएमओ डा. एसके तिवारी ने कहा कि टीबी एक खतरनाक बीमारी है। इसमें लापरवाही बरतने पर मरीज की जान भी जा सकती है। इसके इलाज के लिए जनपद में कुल 35 पीएचसी/सीएचसी पर माइक्रोस्कोपिक जांच केंद्र तथा 859 डाट्स केंद्र स्थापित है। जहां जांच व दवा मरीजों को नि:शुल्क वितरित की जाती है। जिलाक्षय नियंत्रण विभाग के राष्ट्रीय टीवी कंट्रोल प्रोग्राम के तहत जिले में रोग से निजात दिलाने के लिए विभिन्न कार्यक्रम भी चलाए जा रहे हैं।
उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में जनजागरूकता के लिए और प्रचार-प्रसार पर बल दिया। जिलाक्षय रोग अधिकारी योगेंद्र नाथ सिंह ने कहा कि एक बलगम धनात्मक मरीज एक साल में 10 से 15 लोगों को प्रभावित कर सकता है। इसके लिए जिले के 35 पीएचसी/सीएचसी पर सुविधा उपलब्ध है। जहां मरीजों को नि:शुल्क जांच व दवा वितरित की जाती है। टीबी के गंभीर मरीजों को अब इलाज के लिए गैर जनपद या गैर प्रांत नहीं जाना होगा। अब उनका इलाज जिला अस्पताल स्थित जिलाक्षय विभाग में नि:शुल्क होगा। इसके लिए जिलाक्षय विभाग में सीबीनाट मशीन आ चुकी है। जहां नि:शुल्क जांच की जाती है। इस मौके पर सीएमएस डा. जीसी मौर्या, पूर्व एसीएमओ डा. लल्लन प्रसाद, डा. एके सिंह, डा. आरडी राम, डा. अनुराग सिंह, डा. मुश्ताक, राकेश आदि रहे।