बलिया। सरकार की सामूहिक विवाह योजना धरातल पर उतरता दिखाई नहीं दे रहा है। जिले के 17 ब्लाकों के 940 ग्राम पंचायतों से आवेदन मांगें गए थे। इसको लेकर गांव-गांव कर्मचारी भी जाकर आवेदन करने के लिए लोगों से अपील भी करने के साथ पात्रों की तलाश किए लेकिन 17 ब्लाकों से मात्र 29 आवेदन आए हैं। अब इन आवेदनों की जांच होने लगी है।
जिले में 1390 जोड़ों का लक्ष्य मिला था। एक वर्ष पिछले मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना में धांधली के बाद से आवेदन करने वाले भी कतरा रहे हैं। इससे योजना का लक्ष्य पूरा होता दिखाई नहीं दे रहा है। मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत गरीब बेटियों के हाथ पीले किए जाते हैं। इस योजना को और पारदर्शी बनाने के लिए समाज कल्याण विभाग ने नियम और प्रक्रियाओं को और अधिक परिभाषित कर एसओपी तैयार की है।
इसके बाद भी आवेदन करने वाले रूचि नहीं दिखा रहे हैं। इसके लिए समाज कल्याण विभाग के अलावा ब्लाक स्तर के अधिकारियों की ड्यूटी लगाई गई थी। इसके बाद भी आवेदन की संख्या 100 भी नहीं पहुंची है। वर्ष का सत्र भी बीतने वाला है।
अभी तक आए 29 आवेदनों की पात्रता की भी जांच की जा रही है। ऐसे में इस बाद मुख्यमंत्री सामूहिक शादी योजना धरातल पर उतरती नहीं दिख रही है। इस योजना में प्रत्येक कन्याओं की शादी कराने में 51 हजार रुपये खर्च होता है।
इसमें छह हजार रुपये खानपान और टेंट में खर्च होता है। साथ ही 35 हजार रुपये लड़की के बैंक खाते में भेजा जाता है। साथ ही 10 हजार रुपये उपहार के रूप में खर्च किए जाने का प्रविधान है। समाज कल्याण अधिकारी रमेश कुमार ने बताया कि मुख्यमंत्री सामूहिक शादी की योजना के अभी तक आए आवेदनों की पात्रता की जांच की जा रही है। पर्याप्त पात्र नहीं मिलने पर उच्चाधिकारी निर्णय लेंगे।