विहंगम योग का ध्यान आंतरिक शांति का मार्ग प्रशस्त करता है। जब एक साधक विहंगम योग के क्रियात्मक साधना का अभ्यास करता है तो उसके मस्तिष्क के तरंगों में परिवर्तन होता है।
अल्फा तरंगें अत्यधिक रूप में वृद्धि को प्राप्त हो रही हैं। ये बातें विहंगम योग संस्थान की ओर से चल रहे सद्गुरु आचार्य धर्मचंद्र जी महाराज की 46वीं पुण्यतिथि पर संत प्रवर विज्ञानदेव जी महाराज ने कही।
कहा कि विहंगम योग की प्रारंभिक साधना पर वैज्ञानिक शोध हुए हैं। इसका जो परिणाम आया है अद्भुत है। आज तक ऐसा परिणाम विश्व के सामने नहीं आया है। विहंगम योग की साधना सर्वोच्च और सर्वश्रेष्ठ है।
इस साधना के प्रारंभिक स्वरूप को आज हम भौतिक यंत्रों के माध्यम से जान पा रहे हैं। लेकिन यंत्रों के द्वारा विहंगम योग के रहस्यों को समझना संभव नहीं है। संपूर्ण विज्ञान को भौतिक यंत्र नहीं जान पाता। यंत्र के माध्यम से आत्मिक सुख की अनुभूति को प्रकट नहीं किया जा सकता।