गंगा के जलस्तर में वृद्धि जारी है। गुरुवार को दस सेमी प्रति घंटे की रफ्तार से पानी बढ़ने लगा। अगर यही यही बढ़ाव बना रहा तो तटवर्ती क्षेत्रों में खेत और बस्तियां डूब जाएंगी। अचानक तेज बढ़ाव देखकर नदी किनारे बसे गांवों के लोग अपने सामानों को सुरक्षित ठौर देने में जुट गए हैं।
गुरुवार को गंगा के जलस्तर में तेजी से बढ़ाव शुरू हो गया। देखते ही देखते हालात यह बना कि बादिलपुर, गायघाट, रुद्रपुर, डांगरबाद, पचरूखिया, मझौवा, धर्मपुरा में कई गांवों के खेतों में फसल जलमग्र हो गए और गंगा का जलस्तर निचले भाग में भी फैल गया।
वर्षों से बाढ़ और कटान का दंश झेल रहे लोगों का कहना है कि आखिर कब तक गंगा का कहर झेलते रहेंगे। बाढ़ में डूबे किसानों के फसल के बाद पीड़ितों के काफी आर्थिक क्षति हुई। गायघाट निवासी बिगन तुरहा, घुरूल तुरहा, सरल, तेजा, विरोधी, रामकुमार ने बताया कि मौजे में बोई गई परवल की खेती के साथ अन्य खेती भी डूब गई है। इससे रोजी-रोटी पर ग्रहण लग गया है।
अचानक गंगा में पानी के बढ़ने से डेंजर जोन पचरूखिया-मझौंवा पर बने स्परों पर बैकरोलिंग कटान का खतरा मंडराने लगा है। डेंजर जोन पर चल रहा कार्य भी मंद गति से शुरू हो गया है। इससे क्षतिग्रस्त स्परों पर कभी भी मुश्किल बढ़ सकती है। साथ ही एनएच-31 पर खतरा मंडराने लगा है। इस बाबत बाढ़ विभाग के सहायक अभियंता योगेंद्र यादव ने बताया कि अचानक पानी बढ़ने से बाढ़ निरोधक कार्य में बोरियों को डालने का जो क्रम जारी था, वह कुछ धीरे हुआ है क्योंकि पानी तेजी के साथ बढ़ रहा है।
केंद्रीय जल आयोग गायघाट के अनुसार गुरुवार की शाम चार बजे गंगा का जलस्तर 56.40 मीटर दर्ज की गई। प्रतिघंटा दस सेमी का बढ़ाव बना है। नदी कभी भी खतरा बिंदू 57.615 को कभी भी पार कर सकती है।