गंगा का कटान झेल रहे जगदीशपुर गांव के लोग एक बार फिर दहशत में हैं। आलम यह है कि गंगा की लहरों रविवार देर शाम से कृषि योग्य भूमि को अपने पेटे में समाहित करना शुरू कर दिया है।
24 घंटे के अंदर गंगा ने एक रिहायशी आवास के साथ ही पांच मंडा खड़ी फसल लगी भूमि निगल लिया। इसे लेकर कटान पीड़ित दहशत में हैं। सोमवार सुबह मौके पर पहुंचे एसडीएम से कटान पीड़ितों ने सहयोग की मांग की।
गंगा के किनारे बसे जगदीशपुर गांव के पूर्वी हिस्से में रविवार देर शाम अचानक कटान तेज शुरू हो गया। देखते ही देखते आंखों के सामने किसानों की पांच मंडा भूमि खड़ी फसल सहित गंगा की लहरों ने समाहित हो गई।
गंगा तट पर बने वीर पांडेय का एक पुराना पक्का रिहायशी आवास भी लहरों के वेग में समा गया। अचानक शुरू हुए इस कटान से गांव के लोग दहशत में आ गए हैं।
रविवार देर शाम कटार तेज गति शुरू हुई थी, सुबह होते-होते थम गया। कटान की सूचना पर मौके पर पहुंचे बैरिया एसडीएम राधेश्याम पाठक ने स्थिति का जायजा लिया।
साथ ही हर स्तर से प्रशासन द्वारा सहयोग का आश्वासन दिया। वहीं एसडीएम लेखपाल लक्ष्मण सिंह और प्रधान राजनारायण सिंह को कटान पीड़ितों के आवास के लिए पट्टे की भूमि चिह्नित कर आवंटित करने का निर्देश दिया। ताकि कटान की पीड़ा झेल रहे जगदीशपुर के कटान पीड़ितों को राहत मिल सके।