बांसडीहरोड। नवांगतुक तहसीलदार शिवसागर दूबे पूरी तरह एक्शन मूड में है और तहसीलदार यही रूख वर्तमान समय में मानक विहीन स्कूल संचालकों की नींद उड़ा दी है। विगत 12 जुलाई को सदर तहसील में तहसीलदार के पद पर चार्ज लिए तहसीलदार ने अब तक बांसडीहरोड क्षेत्र के कई विद्यालयों का औचक निरीक्षक कर चुके हैं। मंगलवार को तहसीलदार ने छ: विद्यालयों का निरिक्षण किया, निरिक्षण के बाद सभी विद्यालयों में उन्होंने जांच बैठाई है। तहसीलदार ने बताया कि जांच प्रगति पर है, जल्द ही रिपोर्ट डीएम को सौंपी जाएगी। फिर कार्रवाई की जाएगी। कहा कि ऐसे बहुतेरे विद्यालय मिले जिसमें मान्यता तो है लेकिन पांच तक, लेकिन नियम को ताक पर रखकर दस या 12 तक स्कूल चला रहे हैं। इसके अलावा ऐसे स्कूल जहां वाहन आने जाने के समुचित मार्ग या प्ले ग्राउंड तक नहीं है। ऐसे स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई तय है।
सदर तहसील क्षेत्र के नवागत तहसीलदार के आने के बाद शंकरपुर मां भगवती मंदिर समीप कई प्राइवेट विद्यालयों में बीते दिन औचक निरीक्षण किया और मंगलवार को लगभग छ: विद्यालयों का निरिक्षण किया। जिसमें कई विद्यालयों में मानक विहीन एवं अनियमितता पाई गई। जिस पर तहसीलदार ने कड़ी चेतावनी देते हुए फटकार भी लगाई। उधर तहसीलदार के लिखा-पढ़ी के बाद एक सप्ताह भी नहीं बीता कि शंकरपुर स्थित एक निजी विद्यालय कार्रवाई होने से पहले ही ताला बंद कर फरार हो गया। अब अभिभावक विद्यालय के आसपास चक्कर काट रहे हैं कि उनके लाडले के साथ क्या होगा।
उन्होंने अब दूसरे विद्यालय में अपने बच्चों का नामांकन कराना भी शुरू कर दिए हैं। उधर क्षेत्र के पंकज पाठक, जितेंद्र सिंह, महेंद्र प्रताप सिंह आदि लोगों ने बताया कि क्षेत्र में अभी भी बिना मान्यता प्राप्त, बिना साइन बोर्ड लगाए निजी विद्यालय धड़ल्ले से अभी भी चला रहे हैं। इन विद्यालयों में इंटरमीडिएट तक के बच्चों का पढ़ाने का एवं फार्म भरवाने का भी जिम्मा लिया जाता है। बच्चों को तब पता चलता है, जब उनके हाथ में प्रवेश पत्र मिलता है, तब वह छात्र किसी अन्य विद्यालय में नामांकन हुआ रहता है। वैसे में ऐसे विद्यालयों द्वारा प्रैक्टिकल के नाम पर धनउगाही की जाती है। इससे हजारों छात्र का भविष्य संकट में पड़ा रहता है। उधर सदर तहसीलदार शिवसागर दूबे ने बताया कि बिना मान्यता प्राप्त विद्यालय शीघ्र ही बंद होंगे। कहा कि अभिभावकों को भी चाहिए कि मानक विहीन विद्यालयों में बच्चों का दाखिला न कराए।